रीवा। मऊगंज बाईपास की एक विवादित जमीन का मामला सुलझाने गए और वहीं धरने पर बैठे विधायक प्रदीप पटेल का मामला उन्हीं के लिए परेशानी का कारण बन गया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब अपना गुस्सा दिखाया और मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे, साथ ही विवाद की स्थिति बनने लगी तो मजबूरन विधायक प्रदीप पटेल को वहां से निकलना पड़ा। हालांकि तब तक पुलिस भी पहुंच गई थी और पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से उन्हें वहां से हट जाने के लिए कहा था। लेकिन इस घटनाक्रम के बाद विधायक प्रदीप पटेल की क्षेत्र में काफी किरकिरी हो रही है।
इस मामले में हमारे सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भाजपा विधायक प्रदीप पटेल एक विवादित जमीन पर कांग्रेस नेता के समर्थन में धरने पर बैठे थे, उन्हें ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि ग्रामीणों ने विधायक को घेरकर ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और मौके से खदेड़ दिया। अब सवाल यह है कि आखिर अपनी ही विधानसभा में विधायक को अपनों के बीच से भागने पर क्यों मजबूर होना पड़ा मऊगंज बायपास पर कड़कड़ाती ठंड में प्लास्टिक की पन्नी के नीचे धरने पर बैठे भाजपा विधायक प्रदीप पटेल को शायद अंदाजा नहीं था कि उन्हें यहां से यूं खदेड़ दिया जाएगा। कांग्रेस नेता विनोद मिश्रा के पक्ष में खड़े विधायक ने जैसे ही दूसरे पक्ष के लल्लू पांडेय को पुलिस के जरिए थाने भिजवाया, तो ग्रामीणों का सब्र टूट गया।
देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जुट गए और विधायक को चारों तरफ से घेर लिया। हवा में ‘प्रदीप पटेल मुर्दाबाद’ के नारे गूंजने लगे। ग्रामीणों ने विधायक से तीखे सवाल पूछे कि जब मामला कोर्ट में लंबित है, तो वे उसमें दखल क्यों दे रहे हैं? हालात उस वक्त और गंभीर हो गए, जब लल्लू पांडेय के परिवार ने आत्मदाह की कोशिश की। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने साफ शब्दों में कह दिया— “हमारी जमीन से बाहर जाइए।”
माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि विधायक का वहां रुकना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों के उग्र तेवर देखकर पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस ने घेरा बनाकर विधायक को भीड़ से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित लोगों ने विधायक की गाड़ी तक रोक ली। काफी मशक्कत और पुलिस की सूझबूझ के बाद विधायक को वहां से सुरक्षित निकाला गया, जिसे प्रत्यक्षदर्शी खुलकर ‘विधायक को खदेड़ना’ बता रहे हैं।
एक तरफ भाजपा विधायक और दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेता की इस जुगलबंदी ने मऊगंज की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। अपनी ही जनता के विरोध के आगे विधायक को पीछे हटना पड़ा। थाने में घंटों बैठने के बावजूद किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज न होना, इस पूरे मामले में कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है।
विधायक के धरने से परेशान है प्रशासन
मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल धरना देने के मामले में काफी अव्वल हैं। कोई मामला अगर सुलझता हुआ नहीं दिखता तो वह धरने पर बैठ जाते हैं। बाईपास के निकट यह एक निजी जमीन के विवाद का मामला था। जिस पर विधायक पटेल अपने समर्थक को कब्जा दिलाना चाह रहे हैं। जबकि दूसरा पक्ष यह दावा कर रहा है कि इस जमीन पर उनके पैतृक हिस्सा है। इसी बात को लेकर दोनों पक्ष पहले से विवाद की स्थिति में है जिसमें से एक पक्ष का समर्थन विधायक प्रदीप पटेल करने पहुंचे थे। जिस पर उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।