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सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों के मार्जिन को बताया डकैती-लूट


दवा की कीमत 100, 200 गुना क्यों होनी चाहिए?
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जरूरी दवाओं पर भारी मार्क-अप को लेकर केंद्र सरकार और प्राइवेट अस्पतालों से तीखे सवाल पूछे हैं। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र से पूछा “क्या आप इस लूट का कोई उचित कारण बता सकते हैं? कीमत में इतना अंतर क्यों हैं? यह पैसा कहां जाता है?”कोर्ट ने बताया कि एंटी कैंसर दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत पर लिमिट करने के केंद्र के हालिया फैसले के बावजूद, मार्केट में करीब 90 फीसदी दवाएं डीपीसीओ के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि सलाइन ड्रिप जैसे कंज्यूमेबल्स, जिनकी रिटेलर कीमत 15 रुपये है, उनका बिल रेगुलर तौर पर मरीजों से 250 रुपये लिया जाता है। बेंच ने केंद्र से कहा, “मान लीजिए कि दवा पर 100 रुपये एमआरपी छपा है। रिटेलर को यह 10 या 20 रुपये में मिलती है, तो फिर कीमत 100 रुपये क्यों बताई जा रही है? सरकार इसे जारी रखने की इजाजत क्यों दे रही है और कह रही है कि वे इसे रेगुलेट नहीं करेंगे क्योंकि शेड्यूल्ड दवा नहीं है? कोर्ट ने कहा आयुष्मान भारत स्कीम जैसे पहल मेडिकल खर्च की भरपाई करती है लेकिन सरकारी कवरेज 5 लाख रुपये तक ही सीमित है, जिससे आम लोगों को अस्पताल के बढ़े हुए बिलों का बोझ उठाना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा दवा की कीमत 100, 200 गुना क्यों होनी चाहिए? कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार यह बताने में विफल रही है कि दवाओं की निर्माण लागत और खुदरा कीमत के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों हैं।कोर्ट ने टिप्पणी की “आप लोगों की जिंदगियों से जुड़े मामलों पर काम कर रहे हैं। इसे सिर्फ व्यापार न समझें। यहां कोई संतुलन नहीं है।
एसिड की बिक्री पर रोक वाली गाइडलाइन सभी राज्यों में लागू कराएं
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक की घटनाओं से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान उसने कहा कि गाइडलाइन बनी है, इसके बावजूद घटनाएं हो रही हैं। इसका मतलब है कि इसमें कुछ कमी है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि एसिड की बिक्री पर रोक वाली गाइडलाइन सभी राज्यों में लागू कराए। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि एसिड आज भी बाजार में आसानी से मिल रहा है। केंद्र-राज्यों को मिलकर इसका समाधान करना होगा। बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार को यह नहीं मान लेना चाहिए कि गाइडलाइन जारी करने के बाद उसकी जिम्मेदारी राज्यों पर आ गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या उसने किसी राज्य से घटनाओं को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। बेंच ने कहा कि सर्कुलर में सहानुभूति भरी भाषा लिखकर निर्देश जारी करने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। अगर घटनाएं बढ़ रही हैं, तो इसका मतलब है कि नीति बुरी तरह विफल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गाइडलाइन में कई कमियां हैं, जिनका लोग गलत फायदा उठा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्यों को आपस में तालमेल कर इन कमियों को दूर करना होगा।”
हमें सब पता है, अदालत सभी पहलुओं की जांच करेगी
चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि अदालत चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा “हमें सब पता है। हम इसकी जांच करेंगे।”

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