प्रधानमंत्री ने भुवनेश्वर में साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया
कांग्रेस की सरकारों में बैंकिंग सुविधाएं सिर्फ कुछ अमीरों तक सीमित थीं
बैंकिंग प्रणाली को साइबर आतंकवादियों से बचाने की जरूरत
भुवनेश्वर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय रिजर्व बैंक के 169 करोड़ रुपये के डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि आरबीआई के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान से ओडिशा और देश के लोगों को लाभ होगा. उन्होंने कहा “हमारे लिए विकास का मतलब भारत की संतुलित वृद्धि और गांवों तथा छोटे शहरों के लिए अवसर उपलब्ध कराना है.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का बैंकिंग क्षेत्र अब दुनिया के सबसे दक्ष क्षेत्रों में शामिल है और लोगों को 24 घंटे बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमियों, पारंपरिक कारीगरों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को पहली बार बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिला है. उन्होंने कहा “कांग्रेस की सरकारों में बैंकिंग सुविधाएं सिर्फ कुछ अमीर और प्रभावशाली लोगों तक सीमित थीं. उन्हें आसानी से कर्ज मिल जाता था, जबकि गरीबों, मध्यम वर्ग और महिलाओं को ऐसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता था. हालांकि, 2014 के बाद संतुलित दृष्टिकोण अपनाने से स्थिति बदली. पहले आम लोगों के लिए डेबिट और क्रेडिट कार्ड विलासिता की चीजें थीं, लेकिन अब ये सभी के लिए उपलब्ध हैं.” उन्होंने कहा “पिछला दशक उन लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए समर्पित था, जो इनसे वंचित थे. आने वाला दशक बैंकिंग सेवाओं को अधिक दक्ष और भरोसेमंद बनाने का होगा.”प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा खनन से लेकर ‘माइक्रोचिप’ तक के क्षेत्रों में अपना भविष्य गढ़ेगा और युवाओं के लिए नए मौकों के कई द्वार खुलेंगे. मोदी ने कहा कि युद्ध अब केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाकर भी लड़े जा रहे हैं. उन्होंने भारत की बैंकिंग प्रणाली को साइबर आतंकवादियों से बचाने की जरूरत पर जोर दिया.
जो लोग राष्ट्र के लिए जीते हैं वे अपने आप में एक तीर्थ
प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो प्रसारण मन की बात की 12 साल की यात्रा को “तीर्थयात्रा” बताया है। मोदी ने कहा कि यह देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने एवं उनके योगदान को नमन करने की एक तीर्थयात्रा से कम नहीं है। कार्यक्रम के 139वें संस्करण में पीएम मोदी ने कहा कि इस रेडियो प्रसारण के माध्यम से वह एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करते हैं और इसके माध्यम से उन्हें देश के हर परिवार से जुडऩे का मौका मिलता है। पीएम ने कहा “आज से 12 वर्ष पहले, विजयादशमी के पावन अवसर पर हमने ‘मन की बात की शुरुआत की थी। तब से अब तक हमारी यह यात्रा निरंतर जारी है।प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए मन की बात देश की आम जनता के परिश्रम, उसके पराक्रम, उसकी प्रतिबद्धता, उसके समर्पण एवं सेवा-भाव का गौरवगान करने का एक शुभ अवसर रहा है। उन्होंने कहा “हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। मेरे लिए मन की बात भी देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने की और उनके योगदान को नमन करने की एक तीर्थ यात्रा से कम नहीं है।”मोदी ने कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे अपने आप में एक तीर्थ के ही स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि इन 12 साल में देश के हर कोने से ऐसे अनेक लोग सामने आए हैं जिनके असाधारण कार्यों की ओर सामान्य रूप से समाज का ध्यान नहीं जाता। इस कार्यक्रम के माध्यम से मैं एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं। मुझे इसके माध्यम से देश के हर परिवार से जुडऩे का अवसर मिलता है।”
महर्षि वाल्मीकि ने दी जीवन की गहरी सीख
पीएम ने कहा,”महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है। एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं।” “वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का बहुत सुंदर उदाहरण है। भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया। निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने का भाव, ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं।

