नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति बनाए रखने के लिए ताकत और क्षमता का होना जरूरी है। टाइम्स नेटवर्क नेशनल डिफेंस कॉन्क्लेव 2026′ में बोलते हुए सिंह ने कहा कि शांति की कामना करना हमारी सभ्यतागत चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों का एक अहम हिस्सा है। हमारी संस्कृति हमें बातचीत, सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता दिखाती है। लेकिन शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को हमारी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। शांति बनाए रखने के लिए ताकत और क्षमता का होना भी जरूरी है।
रक्षा मंत्रीने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान की तरफ से आगे कोई और आतंकी गतिविधि होती है, तो भारत पहले के ऑपरेशनों से भी बड़ा हमला करेगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक प्रहार बताते हुए सिंह ने कहा कि इसने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आतंकवाद का रास्ता चुना है, वे अब इस रास्ते पर ज्यादा दिन नहीं टिक सकते। हमारे सशस्त्र बल उन्हें बहुत जल्दी परलोक भेज देते हैं। 2014 के बाद से, ज्यादातर आतंकियों की ‘जीवित रहने की अवधि)1 साल से भी कम हो गई है। यानी, भारत के खिलाफ हथियार उठाने के एक साल के भीतर ही, हमारे सुरक्षा बलों ने ज्यादातर आतंकियों को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि मानवता में विश्वास रखने वाले एक अकेले व्यक्ति का साहस, नफरत से भरे किसी अकेले आतंकी के इरादों पर भारी पड़ सकता है। कैप्टन स्मिथ मच्छर का साहस इस विश्वास को और मजबूत करता है कि आतंक की ताकत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, मानवता के लिए समर्पित व्यक्ति का संकल्प उसे हरा सकता है। सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त जवाबी कार्रवाई के महत्व को दोहराते हुए कहा कि याद रखें 2019 में जब पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था, तो हमारे सशस्त्र बलों ने बालाकोट में हवाई हमले किए थे और यह भी याद रखें कि पिछले साल, जब आतंकवादियों ने पहलगाम में हमारे निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी थी, तब हमने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया था। भारत के इतिहास में यह पहली बार था जब भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवाद के सीने पर एक निर्णायक प्रहार किया था।

