हम आइवरी टावर में नहीं बैठे हैं
नई दिल्ली: ाराहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता और अदालतें आइवरी टावर यानी दुनिया से कटकर नहीं बैठी हैं।
सीजेआई ने कहा कि इस तरह की कोशिशें बेकार हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता। उन्होंने कहा “हम आइवरी टावर में नहीं बैठे हैं। हमें हर चीज की जानकारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और अदालत के भीतर क्या हो रहा है। दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर सीजेआई ने कहा कि सभी याचिकाओं पर नोटिस जारी किया जा रहा है और केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा जाएगा। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों से भी जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन मामलों की सुनवाई मुख्य मामले के साथ की जाएगी। वहीं दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर तक मार्च निकालने के मामले पर भी सवाल उठाए।
महिला पत्रकारों पर जांच के लिए समिति
सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों पर पुलिस के कथित हमले के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने के संकेत दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से दो अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में दस्तावेज जमा करने को कहा है। पहले लिफाफे में उन महिला पत्रकारों के नाम देने को कहा गया है जिन पर कथित तौर पर हमला हुआ था। दूसरे लिफाफे में सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीशों और पुलिस अधिकारियों के नाम देने को कहा गया है जिन्हें प्रस्तावित जांच समिति में शामिल किया जा सकता है।
हिन्दू से मुस्लिम में कन्वर्ट हुआ व्यक्ति ओबीसी आरक्षण नहीं ले सकता
धर्म परिवर्तन और जाति आधारित आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था में पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जाति से जुड़े किसी व्यक्ति को दूसरा धर्म अपनाने के बाद उसी आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। कोर्ट के मुताबिक, हिंदू जाति व्यवस्था के तहत व्यक्ति की सामाजिक पिछड़ेपन की स्थिति दूसरे धर्म में जाने के बाद अपने आप स्थानांतरित नहीं होती सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पहले किसी पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जाति से जुड़े होने के आधार पर दूसरे धर्म में जाने के बाद आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता। यह फैसला हिंदू सामाजिक व्यवस्था में जाति आधारित सामाजिक पिछड़ेपन और दूसरे धर्म में परिवर्तन के बाद आरक्षण के लाभ से जुड़े मामले में आया है।
सोशल मीडिया पर फैल रहे बच्चों के अश्लील वीडियो बेहद गंभीर मामला
सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी बच्चों के अश्लील वीडियो के फैलने पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार से साफ कहा है कि यह एक बेहद गंभीर मामला है और इसे उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इशारा किया है कि इस समस्या से निपटने के लिए जल्द ही सख्त कदम और दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

