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एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कार्यवाही शुरू करने से पहले प्रशासनिक जांच जरूरी’


नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के दौरान माना कि एससी/एसटी अत्याचार निवारण एक्ट-1989 के तहत सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से पहले प्रशासनिक जांच जरूरी है। कोर्ट ने इस कड़े कानून के तहत तमिलनाडु के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस और एक सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ चल रही कार्रवाई को रद्द कर दिया।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि कहा कि भले ही एक अंतरिम आदेश ने मामले की जांच पर रोक लगा दी थी, लेकिन इससे राज्य को एडमिनिस्ट्रेटिव जांच करने से नहीं रोका गया था। इसके बाद बेंच ने इस स्टेज पर एडमिनिस्ट्रेटिव जांच रिपोर्ट पाने के लिए मामले को स्पेशल कोर्ट में वापस भेजने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा “हमारी राय है कि इस समय, सक्षम अथॉरिटी से एडमिनिस्ट्रेटिव जांच रिपोर्ट पाने के लिए मामले को स्पेशल कोर्ट में वापस भेजने की कोई जरूरत नहीं है।”बेंच ने माना कि चूंकि सेक्शन-4 के प्रोविजो के तहत एडमिनिस्ट्रेटिव जांच की जरूरी शर्त का पालन नहीं किया गया था, इसलिए कार्यवाही जारी रखने का कोई कारण नहीं था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले में आगे कोई कार्यवाही न की जाए।
‘वंदे मातरम न गाने पर नहीं हो सजा
वंदे मातरम गाने से इनकार करने वाले किसी को दंडित नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट नेकेंद्र सरकार से कहा कि वह इस मामले में 1986 के अपने उस फैसले को ध्यान में रखे, जिसमें अंतरात्मा के आधार पर राष्ट्रगान गाने से इनकार करने वाले स्कूली बच्चों को संरक्षण दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत यह तय करने नहीं जा रही है कि राष्ट्रीय गीत क्या होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत के रूप में क्या तय किया जाए, यह राज्य के अधिकार क्षेत्र का विषय है। पीठ ने यह भी कहा कि अदालत राष्ट्रीय भावनाओं या वंदे मातरम से जुड़ी आकांक्षाओं पर फैसला देने के लिए नहीं बैठी है। उसका ध्यान इस बात पर रहेगा कि कानून के तहत ‘कर्तव्यनिष्ठ आपत्तिकर्ता’ के अधिकार सुरक्षित हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक आधार या अपनी अंतरात्मा के कारण वंदे मातरम गाने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर होगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगर निकायों को आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां संबंधित संपत्ति को सील किया जाए। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों में यह स्पष्ट रूप से तय नहीं है कि उनका इस्तेमाल आवासीय या व्यावसायिक किस उद्देश्य के लिए किया जाना है, उनकी भी जांच की जाए। हालांकि, फिलहाल ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है। पीठ ने कहा “हम यह स्पष्ट करते हैं कि सभी प्राधिकरण बिना किसी भेदभाव के यह प्रक्रिया पूरी करेंगे। अगर वे चुनिंदा तरीके से कार्रवाई करते हैं तो अदालत इस मामले को गंभीरता से लेगी।”

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