तुच्छ आपराधिक मामले भारत की न्याय व्यवस्था को दुनिया के सामने उपहास का पात्र बना रहे
नई दिल्ली :सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने कहा कि तुच्छ आपराधिक मामले भारत की न्याय व्यवस्था को उदार लोकतांत्रिक दुनिया के सामने उपहास का पात्र बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि निचली अदालतों को ऐसे मामलों को खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए। जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने कहा कि सिर्फ खाना खाने, कविताएं सुनाने, प्रदर्शनों में शामिल होने, नारे लगाने, सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने और स्टैंड-अप कॉमेडियन के रूप में प्रस्तुति देने जैसे मामलों में भी आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इसके अलावा, किताबों और फिल्मों के शीर्षक तथा उनकी सामग्री समेत कई अन्य तुच्छ आधारों पर भी मामले दर्ज हो रहे हैं।
जस्टिस भुयान ने कहा कि ये आरोप हास्यास्पद हैं और अक्सर व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का अपमान करने वाले होते हैं। इसके बावजूद, ऐसे आपराधिक मामलों का पंजीकरण बेरोकटोक जारी है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में आरोप पत्र भी दाखिल किए जाते हैं, जिसके बाद मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो जाती है।”उन्होंने कहा “जब अदालतों की व्यवस्था में इतने सारे मामले लंबित हों और व्यवस्था उनसे निपटने में असमर्थ हो, यानी स्थिति लगभग चरमरा जाने की हो, तब ऐसे तुच्छ मामलों को भी इसमें जोड़ देने से निचली अदालतों पर असहनीय बोझ और बढ़ गया है।”जस्टिस भुयान ने कहा ये मामले व्यवस्था को और अधिक अव्यवहारिक बना रहे हैं। इनमें नतीजे लगभग पहले से ही तय होते हैं और हमारी न्याय व्यवस्था उदार लोकतांत्रिक दुनिया के सामने उपहास का पात्र बन रही है। हम जितनी जल्दी इस दिशा में कदम उठाएंगे, हम सभी के लिए उतना ही बेहतर होगा।”जस्टिस भुयान ने कहा कि वकीलों को मुकदमे के नतीजे को प्रक्रिया से ऊपर नहीं रखना चाहिए। भुयान ने कहा कि दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के लिए सबूत छिपाने वाला अभियोजक और बरी कराने के लिए गवाह से छेड़छाड़ करने वाला बचाव पक्ष का वकील एक ही गलती करते हैं, वे मुकदमे के नतीजे को न्यायिक प्रक्रिया से ऊपर रखते हैं।

