लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गुंडा एक्ट के इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार लगातार उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ गुंडा एक्ट 1970 का इस्तेमाल दमन के एक हथियार के तौर पर कर रही है, जबकि अदालतें बार-बार इस कानून के दुरुपयोग को लेकर सरकार को आगाह करती रही हैं। यह टिप्पणी जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने जाहिद अली बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य के मामले में की। कोर्ट ने गोंडा के जिला मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जाहिद अली को गुंडा घोषित किया गया था।
हाई कोर्ट ने कहा कि अदालतों ने बार-बार यह माना है कि गुंडा एक्ट 1970 गुंडों के नियंत्रण और दमन के लिए एक शक्तिशाली हथियार है और इसका उपयोग सार्वजनिक अव्यवस्था के बहुत स्पष्ट मामलों में या सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए बहुत ही संयम से किया जाना चाहिए।इसमें यह भी कहा गया है कि अदालतों ने राज्य को नियमित रूप से यह याद दिलाया है कि वह इसका दुरुपयोग निर्दोष व्यक्तियों के खिलाफ उत्पीडऩ के हथियार के रूप में न करे, क्योंकि कानून का उद्देश्य किसी व्यक्ति को किसी ठोस अपराध के लिए दोषी ठहराए बिना दंडित करना नहीं है। हाई कोर्ट ने यह बात नोट की “इस न्यायालय के समक्ष अनेक मामले प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि राज्य गुंडा एक्ट को उत्पीडऩ के एक हथियार के रूप में लगातार इस्तेमाल कर रहा है। अब यह वर्तमान मामला उपरोक्त कानून के दुरुपयोग का एक ज्वलंत उदाहरण है।
