ब्रिक्स समिट के पहले दिन प्रधानमंत्री ने किया संबोधित
मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए
यूएनएससी सुधारों के लिए अब और इंतजार नहीं किया जा सकता
वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना एक पिरामिड की तरह दिखती है
चीनी राष्ट्रपति को सामने बिठा मोदी ने दिए 3 ‘म्यूचुअल’ मंत्र
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ को नियमों का पालन करने वाले के बजाय ”नियम तय करने वाला” बनना होगा. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है और यह गुट किसी के विरुद्ध नहीं है. उनके इस बयान को अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री ने कहा, ”आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह सबसे पीछे की पंक्ति में है. हमें इस ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा. उन्होंने कहा कि एक ऐसा मंच हो जहां हर देश की आवाज हो, इसके अलावा हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो. उन्होंने कहा, ”इस संबंध में, मेरा प्रस्ताव है कि हम संयुक्त रूप से वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव को तैयार करें, जिसका मकसद अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें एक ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप देना हो.”पीएम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार का भी आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यूएनएससी सुधारों के लिए अब और इंतजार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा ”वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना एक पिरामिड की तरह दिखती है- सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तरों में वे देश शामिल हैं जो इन निर्णयों से प्रभावित होते हैं और उन्हें आकार देने में असमर्थ हैं.”मोदी ने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को ”नियम तय करने वाला” बनना होगा. उन्होंने नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच एक नाविक नेटवर्क का भी प्रस्ताव रखा.
ब्रिक्स भी परिपक्वता के मुकाम पर पहुंच गया
प्रधानमंत्री ने कहा,आज ब्रिक्स भी परिपक्वता के मुकाम पर पहुंच गया है। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और आम सहमति से आगे बढ़ते हैं। हम किसी का विरोध करके नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढऩे का प्रयास करते हैं। अब समय आ गया है कि हम ब्रिक्स के भीतर अपनी एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें।”
बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के माध्यम से नहीं चलाया जा सकता
प्रधानमंत्री ने कहा “हमारे विचारों में विविधता के साथ-साथ, ब्रिक्स सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। आज की चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के माध्यम से नहीं चलाया जा सकता प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण में सुधार आवश्यक हैं। भविष्य की तकनीकों और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में ‘ग्लोबल साउथ’ की समान भागीदारी होनी चाहिए। फैसलों और उनके नतीजों के बीच के अंतर को साझेदारी और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से पाटा जाना चाहिए। आज अपनाया गया घोषणापत्र हमारे साझा संकल्प के लिए एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है। अब इन संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलना हमारी जिम्मेदारी है।
“चीन और भारत एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं : जिनपिंग
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने पूरे क्षेत्र के लोगों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों की पूर्ति नहीं करता है। जिनपिंग ने कहा “उलझे अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ के अहम सदस्यों के तौर पर चीन और भारत की बड़ी जिम्मेदारियां हैं। दोनों पक्षों को मानवता के भविष्य और अपने लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए, व्यापक ब्रिक्स ढांचे के भीतर उच्च-गुणवत्ता वाले सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। हमें एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया और समावेशी और आपसी लाभ वाले आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत करनी चाहिए, ताकि विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में और अधिक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके। जिनपिंग ने कहा, “चीन और भारत एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं
ब्रिक्स देशों ने की पहलगाम हमले की निंदा
घोषणापत्र के मुताबिक ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की कड़ी निंदा की, चाहे उसका मकसद, जगह या उसे अंजाम देने वाले कोई भी हों। ब्रिक्स समूह देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले की निंदा की, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। घोषणापत्र में सीमा-पार आतंकवाद, आतंकवाद के लिए फंडिंग और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मिलने जैसी समस्याओं से निपटने के संकल्प को दोहराया गया। साथ ही, इस बात पर जोर दिया गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ब्रिक्स ने आतंकवाद के प्रति जोरो टॉलरेंस अपनाने, इसमें शामिल लोगों की जवाबदेही तय करने और संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया।

