लद्दाख के लोगों को न्याय के लिए नहीं तय करना होगा लंबा सफर: शाह


लद्दाख में होगी जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की बेंच
नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने लद्दाख के लोगों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की एक बेंच स्थापित करने का फैसला किया है। इस कदम से केंद्र शासित प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए हाई कोर्ट तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
अमित शाह ने कहा कि लद्दाख में हाई कोर्ट की बेंच स्थापित होने से लोगों को अपने कानूनी अधिकारों और न्यायिक सेवाओं का लाभ उठाने में लगने वाला समय कम होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख के समग्र विकास और वहां के लोगों के लिए संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। लद्दाख भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम और विशाल क्षेत्र है। ऐसे में हाई कोर्ट से जुड़े मामलों के लिए लंबी दूरी तय करना स्थानीय लोगों के लिए समय और संसाधन दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहा है। हाई कोर्ट की बेंच स्थापित होने के बाद लोगों को कानूनी उपायों के लिए दूर की यात्रा करने की जरूरत कम हो सकती है। केंद्र के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य लद्दाख के नागरिकों के लिए न्यायिक सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाना है। हाई कोर्ट की बेंच स्थानीय स्तर पर न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों में लोगों की सुविधा बढ़ा सकती है और कानूनी कार्रवाई में लगने वाले समय को कम कर सकती है। अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्र के इस फैसले को लद्दाख में प्रशासनिक और न्यायिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हाई कोर्ट की बेंच की स्थापना से लद्दाख के लोगों को न्याय पाने के लिए लंबी और कठिन यात्राओं से राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर दूरदराज और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह फैसला न्यायिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
वोट बैंक के लिए कांग्रेस कर रही वंदे मातरम का अपमान हुआ
केंद्रीय गृह मंत्री ने सरकारी आयोजनों और पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण न गाने के कांग्रेस के फैसले पर करारा हमला बोला है। गृह मंत्री ने कांग्रेस पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी वोट बैंक और “तुष्टिकरण की राजनीति” के खातिर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों और राष्ट्रभक्तों के बलिदान का अपमान कर रही है। शाह ने कहा कि 1937 में कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने के लिए ‘वंदे मातरम’ को दो हिस्सों में बांट दिया था। इससे देश के बंटवारे की नींव पड़ी और ‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ को मज़बूती मिली, जिसके कारण आखिरकार देश का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना।”

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