विकसित भारत की कमान युवाओं के हाथ :मोदी

प्रधानमंत्री ने विवेका स्मारक का किया उद्घाटन
विवेकानंद के आदर्शों पर चलकर युवा बढ़ा रहे राष्ट्र का गौरव
मैसूर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में कहा कि कि व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएं देनी होती है, साधनाएं करनी होती हैं, तप करना होता है, खुद को तपाना और खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता।
मोदी ने कहा कि जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है। इसलिए भाई-बहनों स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में मैसूरु का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले स्वामी जी 1 युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए यहां आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी, लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े उनमें से एक प्रमुख मैसूरु के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तब उन्होंने वहां से मैसूरु के महाराजा को एक पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था। मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था। जो कहते हैं कि वास्तव में वही जीता है, जो दूसरों के लिए जीता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ से जुड़ी सेवाएं हों या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी शिव ज्ञाने, जीव सेवा, यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस स्मारक में ऐसे युवाओं को घडऩा है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब और वंचित के दु:ख आने सुख-दु:ख से ऊपर हो। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरो में जकड़े हुए थे। उस दौर से लेकर आज तक भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है। आज भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। ये सब भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से ही हो रहा है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।
युवाशक्ति का अनुशासित रहना बहुत जरूरी
मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाईल फोन निर्माता बन चुका है वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से। आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से। उन्होंने कहा कि युवाशक्ति का स्वास्थ्य, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना बहुत जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण को एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है।
गुमराह बच्चों को माफ करना चाहता हूं
अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने जंतर-मंतर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें और उनकी दिवंगत मां को अपशब्द कहे गए, लेकिन वह उन बच्चों को सजा नहीं, बल्कि माफी और सही मार्गदर्शन देना चाहते हैं। उन्होंने समाज से भी अपील की कि गुमराह युवाओं को सही रास्ता दिखाने में साथ दें। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती बच्चों ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनकी स्वर्गीय माता को भी गालियां दी गईं, लेकिन वह इस घटना को अलग नजरिए से देखते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन में गलतियां होना स्वाभाविक है और उसी उम्र में सुधार का अवसर भी मिलता है। उन्होंने माना कि समाज में इस घटना को लेकर आक्रोश है और यह सांस्कृतिक झटका भी है कि हमारी बेटियां इस तरह की भाषा कैसे बोल सकती हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को समाज से अलग करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने की जरूरत है।

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