युवाओं को तिलक के नजरिए से देखने चाहिए
पुणे: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि आज के युवाओं को व्यक्तिगत हितों से ऊपर देशभक्ति को अपनाना चाहिए. डोभाल ने लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद यह बात कहीं. अजीत डोभाल ने कहा- “राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा तब तक असंभव है जब तक कि राष्ट्रीय हित को बाकी सभी चीजों से ऊपर प्राथमिकता न दी जाए.”
डोभाल ने आज के युवाओं से राष्ट्र निर्माण के लिए तिलक के दृष्टिकोण और उन्हें हासिल करने के लिए किए गए उनके कार्यों पर विचार करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा “ऐसे समय में जब कुछ ही लोगों ने अपनी आवाज उठाने की हिम्मत की थी, लोकमान्य ने एक चुनौतीपूर्ण रास्ता चुनकर नेतृत्व प्रदान किया.” उन्होंने युवाओं से अपने जीवन को देश के लिए समर्पित करने और देश के कल्याण को अपने हित से ऊपर रखने का आग्रह किया. डोभाल ने आज के युवाओं से देश को एकता की भावना का समर्थन करने वाले तिलक के नजरिए से देखने का आह्वान किया. एनएसए ने कहा “ब्रिटिश काल के दौरान, तिलक का यह नारा कि ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा’, नए भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता था और इसने नागरिकों में यह विश्वास जगाया था. अगर लोकमान्य तिलक आज जीवित होते तो उनका नारा होता, ‘भारत को मजबूत और विकसित बनाना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे निश्चित रूप से हासिल करूंगा’.”
युवाओं को लोकमान्य तिलक की पुस्तक जरूर पढऩी चाहिए:शाह
अमित शाह ने कहा कि आज के युवाओं को लोकमान्य तिलक की ‘गीता रहस्य’ पुस्तक जरूर पढऩी चाहिए ताकि वे कभी सही रास्ते से न भटकें. शाह ने कहा, “लोकमान्य तिलक ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को दिशा दी और इसी दृष्टिकोण के आधार पर आज देश सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पथ पर आगे बढ़ रहा है.” उन्होंने कहा कि स्वराज के मूल तत्व आत्मनिर्भरता, अनुशासन और कर्तव्य की भावना हैं. शाह ने कहा कि पुरस्कार स्वाभाविक रूप से प्रेरणादायक होते हैं, और जब कोई व्यक्ति महानता हासिल कर लेता है, तो वह अपनी व्यक्तिगत पहचान से ऊपर उठ जाता है.
युवाओं को व्यक्तिगत हितों से ऊपर देशभक्ति को अपनाना चाहिए:डोभाल