कांग्रेस के नेताओं को एक देश एक निशान पर हमेशा दुविधा रहती है :मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय
समान नागरिक संहिता विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी
शादीशुदा होकर लिव-इन में रहने पर 5 साल की सजा

विवाह के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 के ड्राफ्ट को हरी झंडी दे दी है. इस विधेयक को सोमवार से शुरू होने जा रहे विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा. भोपाल के जगदीशपुर में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक का अनुमोदन हुआ है. विधेयक में विवाह के बाद सभी को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया गया है.
कैबिनेट में हुए निर्णय की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक मध्य प्रदेश में क्या राम-क्या रहीम सबको बराबरी का मौका देने वाला है. वैसे तो इसको लेकर एक्ट पारित हो जाता, लेकिन आम जनता से जुडक़र लगभग 2 माह पहले समान नागरिक संहित के लिए कमेटी की गठन किया गया और इसके जरिए प्रदेश के सभी जिलों में परमर्श समिति बैठकें की गईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के ड्राफ्ट पर चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों को बुलाया, इसमें सभी दलों के नेता आए, लेकिन कांग्रेस के नेता शामिल नहीं हुए. पता नहीं कांग्रेस के नेताओं को हिंदू-मुस्लिम के वोटों पर क्या परेशानी रहती थी. उन्हें एक देश एक निशान पर हमेशा दुविधा रहती है. मुख्यमंत्री ने कहा, इस विधेयक के पूर्व प्रदेश भर में बड़े स्तर पर लोगों के बीच पहुंच कर चर्चा की गई. इसके ड्राफ्ट के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक चर्चा के दौरान 80 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम बहनों ने एक समान कानून की पैरवी की है. इसके अलावा 40 फीसदी मुस्लिम पुरुषों ने भी इसका समर्थन किया है. 3.94 करोड़ एसएमएस लोगों को भेजे गए. समिति को लेकर भी 9 लाख 58 हजार से ज्यादा सुझाव प्राप्त हुए हैं. इस ड्राफ्ट को जनता तक ले जाने का पूरा प्रयास किया गया. इस समान नागरिक संहिता के विधेयक के ड्राफ्ट को 93.7 फीसदी लोगों ने अपना समर्थन दिया. 92.20 फीसदी लोगों ने माना कि प्रदेश में सभी के लिए समान अधिकार होने चाहिए. 92.66 लोगों ने सहमति दी कि सभी समुदाय में महिला और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार मिलने चाहिए. 90.96 फीसदी लोगों ने माना कि व्यक्तिगत कानूनों की वजह से लोगों को कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है. 86.78 फीसदी लोगों ने कहा है कि समान अधिकार संहिता को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू किया जा सकता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद प्रदेश में एक ही विवाह कानूनन माना जाएगा, दूसरा विवाह निषेध माना जाएगा. जब तक कानून सम्मत विवाह विच्छेद नहीं होगा, तब तक दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता.
सिर्फ शब्दों से तलाक नहीं किया जा सकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के बाद विवाह विच्छेद में सिर्फ शब्दों से तलाक नहीं किया जा सकता. कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा. उत्तराधिकारी का चयन भी उसी तरह रहेगा, जो कानूनी रूपी से उत्तराधिकारी होते हैं. एक उत्तराधिकारी में महिला-पुरूष के अधिकार एक समान होंगे. लिव इन रिलेशन में आयु सीमा के अंदर एक महीने से कम समय में पंजीकरण कराना होगा. 21 साल का पुरुष और 18 साल से अधिक उम्र की आयुसीमा निर्धारित होगी. विवाह होने के बाद वह इस दायरे से बाहर हो जाएंगे. विवाहित व्यक्ति द्वारा लिव-इन संबंध बनाने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून के जरिए भेदभावपूर्ण प्रथाओं को रोकने का प्रयास किया गया है. अनुसूचित जाति-जनजाति की प्रथाओं को इससे बाहर रखा गया है.

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