आतंकवाद निवेश और व्यापार को प्रभावित करता है
नई दिल्ली। पाकिस्तान के सामने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस्लामाबाद को खरी-खरी सुनाते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे रवैये को पूरी तरह खारिज कर दिया। शंघाई सहयोग संगठन की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार की मौजूदगी में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता और न ही उससे निपटने में दोहरे मानदंड अपनाए जा सकते हैं। आतंकवादियों को वित्तीय मदद देने वालों, उन्हें समर्थन देने वालों और सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों के लिए भी दुनिया में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद के पूरे तंत्र को मिलकर और मजबूती से खत्म करना होगा।
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद को विकास के सामने सबसे गंभीर खतरों में से एक बताते हुए कहा कि इसका नुकसान केवल लोगों की जान जाने तक सीमित नहीं है। आतंकवाद निवेश और व्यापार को प्रभावित करता है, समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है और युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है, जिनके वे हकदार हैं। भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने दुनिया के सामने भारत की बदलती आर्थिक, तकनीकी और सामरिक हैसियत का भी खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ऐसा राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो समृद्धि, ज्ञान और शक्ति के साथ वैश्विक शांति तथा मानवता के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करे। यह यात्रा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से प्रेरित है। रक्षा मंत्री के मुताबिक भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि में 16 प्रतिशत से अधिक योगदान दे रहा है और लगभग 7.8 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते भारत के उत्पादकों और विनिर्माताओं के लिए नए बाजार खोल रहे हैं। वहीं देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। भारत अब नीतिगत ठहराव से निकलकर सुधारों की तेज रफ्तार वाले दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए सुधार मजबूरी नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास हैं। राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये और रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। देश में स्टार्टअप की संख्या ढाई लाख से अधिक हो चुकी है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 300 गीगावाट तक पहुंचने, सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रगति और यूपीआई के जरिए डिजिटल लेनदेन के विस्तार को भी उन्होंने भारत के परिवर्तन का प्रमाण बताया। चंद्रयान और आदित्य-एल1 की सफलताओं तथा गगनयान की तैयारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि भारत विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है।

