सभी दल राष्ट्रहित के लिए एक साथ खड़े हों
देश को चोट पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग, हमारी संस्कृति से नफरत करने की मानसिकता देश के दुश्मन
नयी दिल्ली: विजयदशमी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित रामलीलाएं भगवान श्रीराम के आदर्शों और उनकी शिक्षाओं को जीवंत बनाए रखने की परंपरा का प्रतीक हैं। विजयादशमी का पर्व अत्याचार और आतंक के अंत की उद्घोषणा करता है तथा यह इस शाश्वत विश्वास को दर्शाता है कि अंतत: सत्य की असत्य पर विजय होती है।
प्रधानमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देशभर में रामलीलाओं का मंचन, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष और असत्य पर सत्य सनातन की विजय का विश्वास. हमारे लिए ये केवल त्योहार नहीं है, ये भारत की प्राण ऊर्जा है। इस देश ने, इसकी संस्कृति ने और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है। ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षस राज रावण का अंत किया था। ये आस्था इसलिए भी है क्योंकि प्रभु राम ने हमें ऐसे आदर्श दिए जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय है। दशहरा कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि हमारे विचार समान हो, हमारी समितियां अर्थात् राष्ट्र की सभी संस्थाएं, सभी राजनीतिक दल राष्ट्रहित के लिए एक साथ खड़े हों। हमें इसी भावना पर चलना होगा, हमें देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लडऩा होगा। देश को चोट पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग, हमारी संस्कृति से नफरत करने की मानसिकता ये देश के दुश्मन हैं। उन्होंने कहा, रामराज्य का मतलब सबके न्याय का होता है और सत्ता का मतलब जनकल्याण होना चाहिए। समाज को बांटने वाले देश के दुश्मन हैं। इन्हें पहचानना होगा। हम सभी को देश के दुश्मनों से मिलकर लडऩा होगा। बुराईयों के खिलाफ सभी को साथ आना होगा। यह हमारे लिए त्यौहार नहीं भारत की प्राण ऊर्जा है।
‘श्रीराम ने हर परिस्थिति में धर्म और सत्य का पालन किया’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम न तो राजा बनने की संभावना से अत्यधिक प्रसन्न हुए और न ही वनवास जाने की परिस्थिति से दुखी। तमाम कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्होंने धर्म का पालन किया और सत्य की स्थापना की। उनका जीवन सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्तव्यों और सिद्धांतों से पीछे नहीं हटना चाहिए। भगवान श्रीराम के जीवन से हमें बड़ी सीख मिलती है कि संकट कितना भी बड़ा हो और चुनौती कितनी भी कठिन, हमें दूसरों के भरोसे बैठकर इंतजार नहीं करना चाहिए। हमें अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए, अपने संसाधनों पर विश्वास करना चाहिए, अपने संकल्प को ताकत में बदलना चाहिए और कड़ी मेहनत के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। आज भारत को भी इसी मंत्र के साथ आगे बढऩा होगा। उन्होंने जोर दिया कि देश के सामने विकसित भारत के निर्माण और आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य है, जिसे दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के जरिए पूरा किया जा सकता है।
पुलिस कर्मियों का देश नहीं भूलेगा सर्वोच्च बलिदान
प्रधानमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि दी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध से निपटने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनके योगदान को सराहा। पीएम ने कहा कि ड्यूटी के दौरान अपनी जान देने वाले बहादुर पुलिस कर्मियों का अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान हमेशा हमारे देश की याद में रहेगा।पीएम ने कहा कि’पुलिस स्मृति दिवस हमारे पुलिस कर्मियों के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त करने का एक मौका है जो अक्सर सबसे मुश्किल हालात में भी बहुत कमिटमेंट के साथ काम करते हैं। कानून और व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अपराध से निपटने, आपातकाल में जवाब देने और नागरिकों की सुरक्षा पक्का करने तक, उनका योगदान बहुत कीमती है।

