मुख्यमंत्री ने बलिदान दिवस समारोह को किया संबोधित
राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह ने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया
प्रधानमंत्री जनजातीय समुदाय के विकास के लिए समर्पित
जनजातीय महापुरुषों का इतिहास पाठ्यक्रमों में शामिल
जबलपुर : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा “जिन अंग्रेजों के बारे में कहा जाता था कि उनके शासन में कहीं सूर्य नहीं डूबता, एक जमाने में उन्होंने भारत के आदिवासी राजाओं को इसलिए मार डाला, क्योंकि उन्होंने गुलामी स्वीकार नहीं की थी. आज दुनिया से अंग्रेजों का ही वर्चस्व समाप्त हो गया है और आदिवासी राजाओं को याद किया जा रहा है.” डॉ. यादव ने कहा “शंकर शाह रघुनाथ शाह के सामने अंग्रेजों ने केवल गुलामी की शर्त नहीं रखी थी बल्कि उनके सामने धर्म परिवर्तन का प्रस्ताव भी रखा था. इन आदिवासी राजाओं ने अंग्रेजों के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया.” उन्होंने कहा लंबे समय तक कांग्रेस आदिवासियों से वोट तो लेती रही लेकिन आदिवासी जननेताओं को ना तो इतिहास में जगह दी और ना ही पाठ्यक्रम में. भारतीय जनता पार्टी ने देश के राष्ट्रपति पद पर भी जनजाति की महिला को बिठाया.मुख्यमंत्री जनजातीय महानायक राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन से पहले अपनी कलम और कविताओं के बल पर मध्यप्रदेश के जनजातीय महानायक अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ अलख जगाई थी। अंग्रेजों के दमन के विरोध में उस समय में जो काम तलवार नहीं कर पाई, वह राजा शंकर शाह की लेखनी ने कर दिखाया। उनके लिखे गीतों ने जनता के बीच आजादी की ललक और अलख जगा कर नयी ऊर्जा का संचार किया। वे देश और धर्म को साथ लेकर चले। स्वभाषा-स्वधर्म-रचनात्मकता और साहित्य की साधना के प्रति राजा शंकर शाह के समर्पण के कारण स्थानीय जन में उनके प्रति बहुत अधिक श्रद्धा थी। उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े रहे। देखते ही देखते अंग्रेजी सरकार की जड़े हिल गईं। ब्रिटिश सैनिकों ने दोनों को बंदी बना लिया और उनके सामने महारानी की अधीनता स्वीकार करने और धर्म बदलने की शर्त रखी। राजा शंकर शाह ने अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब देकर पराधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अंग्रेज अफसरों को बता दिया कि वे रानी दुर्गावती के वंशज हैं, भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों और सनातन पर हमें गर्व है। राजा शंकर शाह की हिम्मत के आगे अंग्रेज अफसर डर गए, उन्हें तोप से बांध कर क्रूरतापूर्वक शहीद कर दिया।
विरासत से विकास की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति का शरीर साथ छोड़ता है, लेकिन उसके विचार सदैव अमर रहते हैं। गौंडवाना के वीर शहीदों राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने सनातन संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। उनका जीवन और बलिदान आने वाली पीढिय़ों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विरासत से विकास की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश के जनजातीय महानायकों के गौरवशाली इतिहास संरक्षित करने और इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय से सिकल सेल एनीमिया को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रदेश स्तर पर स्क्रीनिंग और इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जनजातीय समुदाय की पीड़ा को अच्छी तरह से समझते हैं, उन्होंने सिकल सेल उन्मूलन के लिए अभियान की शुरुआत की।
जनजातीय समुदाय के अतीत को सबके सामने लाना सरकार का दायित्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय महापुरुषों राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह जैसी विभूतियों के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को पाठ्यक्रम में स्थान दिया है। प्रदेश की भावी पीढिय़ां उनके बलिदान और जीवन के प्रेरणादायी कार्यों से परिचित होंगी। राज्य सरकार रानी दुर्गावती लोक का निर्माण करेगी। जनजातीय समुदाय के गौरवशाली अतीत को सबके सामने लाना राज्य सरकार का दायित्व है।
हमारे जनजातीय वीरों ने अंग्रेजों से क्षमा-याचना नहीं की : राकेश सिंह
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह सहित प्रदेश के अनेक महापुरुषों की जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों को पाठ्यक्रम में शामिल कर सम्मान दिया है। हमारे जनजातीय वीरों ने अंग्रेजों से क्षमा-याचना नहीं की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय महापुरुषों से मिली प्रेरणा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। राकेश सिंह ने कहा कि जबलपुर वही पुण्यभूमि है, जहां अंग्रेजों ने राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह को जनता के सामने तोप के मुंह से बांधकर शहीद किया था। अंग्रेजों से पिता-पुत्र ने क्षमा याचना करने से इनकार कर दिया और देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देना स्वीकार किया। श्री सिंह ने कहा कि राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह रानी दुर्गावती की वंश परंपरा से जुड़े थे। उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर प्रत्येक नागरिक को देश और प्रदेश के विकास में अपने हिस्से का योगदान देना चाहिए।

