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क्या मोबाइल फोन सच में आपकी बातें सुनता है? विज्ञापन दिखने के पीछे क्या है असली वजह

कई लोगों का अनुभव होता है कि दोस्तों से किसी प्रोडक्ट या जगह के बारे में बात करने के बाद उसी से जुड़े विज्ञापन सोशल मीडिया या वेबसाइटों पर दिखाई देने लगते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या स्मार्टफोन लगातार हमारी बातें सुन रहा होता है?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस दावे का कोई व्यापक और ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं है कि फोन हर समय आपकी निजी बातचीत रिकॉर्ड करके विज्ञापन दिखाता है। हालांकि, कई ऐप्स आपकी अनुमति मिलने पर माइक्रोफोन, लोकेशन और अन्य डेटा का उपयोग कर सकते हैं।
आखिर विज्ञापन इतने सटीक क्यों दिखते हैं?
कंपनियाँ कई तरह के डेटा का इस्तेमाल करके आपकी रुचियों का अनुमान लगाती हैं।
ऐप परमिशन: कुछ ऐप माइक्रोफोन, लोकेशन, कैमरा और कॉन्टैक्ट्स जैसी अनुमतियाँ मांगते हैं।
ब्राउज़िंग गतिविधि: आपने क्या सर्च किया, किन वेबसाइटों पर गए और किन प्रोडक्ट्स को देखा।
सोशल मीडिया व्यवहार: किन पोस्ट पर रुके, क्या लाइक किया और किस तरह का कंटेंट देखते हैं।
लोकेशन डेटा: आपके आसपास की दुकानों या सेवाओं से जुड़े विज्ञापन भी इसी आधार पर दिखाई दे सकते हैं।
क्या आपका माइक्रोफोन हमेशा चालू रहता है?
स्मार्टफोन में माइक्रोफोन का उपयोग करने के लिए ऐप्स को अनुमति की आवश्यकता होती है। आधुनिक Android और iPhone में यह भी देखा जा सकता है कि कौन-सा ऐप माइक्रोफोन का इस्तेमाल कर रहा है। कई डिवाइस स्क्रीन पर हरे या नारंगी रंग का संकेत भी दिखाते हैं जब कैमरा या माइक्रोफोन सक्रिय होता है।
अपनी प्राइवेसी कैसे सुरक्षित रखें?
अनावश्यक ऐप परमिशन बंद करें।
केवल भरोसेमंद ऐप्स डाउनलोड करें।
नियमित रूप से Privacy Settings जांचें।
जिन ऐप्स का उपयोग नहीं करते, उन्हें हटाएँ।
ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स को अपडेट रखें।
निष्कर्ष
हर बार किसी बातचीत के बाद विज्ञापन दिखना जरूरी नहीं कि फोन आपकी हर बात सुन रहा हो। अधिकतर मामलों में यह आपकी ऑनलाइन गतिविधियों, ऐप परमिशन और विज्ञापन एल्गोरिदम के संयोजन का परिणाम हो सकता है। इसलिए अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स पर समय-समय पर नजर रखना एक अच्छी आदत है।