नई दिल्ली :बीजेपी के पूर्व सांसद और विदेश नीति के जानकार विनय सहस्रबुद्धे ने चेतावनी दी कि एक प्रभुत्वशाली शक्ति की जगह दूसरी शक्ति को नहीं लेने देना चाहिए। ब्रिक्स संवाद के दौरान बोलते हुए सहस्रबुद्धे ने कहा कि वैश्विक कूटनीति में भारत का नज़रिया ऐसा होना चाहिए जो कई शक्ति केंद्रों के साथ जुडऩे की उसकी क्षमता पर आधारित हो, न कि वह किसी एक गुट के साथ पूरी तरह जुड़ जाए।
सहस्रबुद्धे ने कहा कि हम सब बराबर हैं। हम एक लोकतांत्रिक दुनिया में रहते हैं। फिर किसी तरह का दबदबा बनाने या एकाधिकार वाली सोच क्यों होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि हम ब्रिक्स के सदस्य हैं। दूसरी ओर, हम क्वाड के भी सदस्य हैं, और यही वह संतुलन है जो आपको बनाना होता है। मेरा मतलब है, आप अपनी सारी उम्मीदें या दांव एक ही जगह नहीं लगा सकते। सहस्रबुद्धे ने तर्क दिया कि भारत को अलग-अलग जियोपॉलिटिकल ग्रुप्स के साथ संबंध बनाते रहना चाहिए। उनका मानना ??है कि देश की डिप्लोमैटिक ताकत इस बात में है कि वह किसी एक ताकत पर निर्भर हुए बिना अलग-अलग ताकतों के साथ काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि भारत को ऐसा करना चाहिए क्योंकि हम एक मल्टीपोलर दुनिया में हैं, और मेरी समझ से मल्टीपोलैरिटी ही आने वाले समय की दुनिया का मुख्य आधार होगी। उन्होंने कहा कि भारत को व्यापक डिप्लोमैटिक पार्टनरशिप बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी विदेश नीति ज़्यादा से ज़्यादा देशों को स्वीकार्य हो।

