मामलों का जल्द निपटारा करने का प्रयास करना चाहिए
जबलपुर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के तीसवें चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने कहा पूरी व्यवस्था में एक व्यक्ति ऐसा है, जिसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए. वह है मुकदमा लडऩे वाला व्यक्ति यानी पक्षकार. कई बार जब हम सैकड़ों मामलों की सुनवाई करते हैं, तो कोई मामला सिर्फ अदालत की सूची में दर्ज एक नंबर बनकर रह जाता है. लेकिन हर नंबर के पीछे एक इंसान की कहानी होती है. किसी की आजादी का सवाल होता है, कोई अपनी जमीन या संपत्ति के लिए लड़ रहा होता है, कोई पेंशन का इंतजार कर रहा होता है. कोई कई वर्षों से चल रहे मुकदमे के बाद न्याय मिलने की उम्मीद में होता है.”
चीफ जस्टिस ने कहा “अदालत के लिए सैकड़ों मामलों में से सिर्फ एक मामला हो सकता है, लेकिन उस पक्षकार के लिए वही मामला उसकी पूरी जिंदगी हो सकता है. इसलिए हमें मामलों का जल्द निपटारा करने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन न्याय और निष्पक्षता की कीमत पर नहीं. हमें व्यवस्था को बेहतर और तेज बनाने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन किसी पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिए बिना नहीं. हमें तकनीक को अपनाना चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि तकनीक के कारण न्याय एक संवेदनहीन प्रक्रिया न बन जाए. क्योंकि आखिरकार, न्याय इंसानों द्वारा इंसानों को ही दिया जाता है.”चीफ जस्टिस ने कहा” न्यायालय एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है. इसलिए मैं खुद को अपने किसी भी साथी न्यायाधीश से ऊपर नहीं मानता. मैं सभी के सहयोग और अनुभव की अपेक्षा करूंगा और जरूरत पडऩे पर आपकी आलोचना का भी स्वागत करूंगा. क्योंकि जब किसी संस्था में ईमानदारी से असहमति जताने की जगह होती है, तो वह संस्था और मजबूत बनती है. मेरा प्रयास रहेगा कि ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहां हर न्यायाधीश स्वतंत्रता, गरिमा और आत्मविश्वास के साथ काम कर सके.” चीफ जस्टिस ने कहा एक जज के पास कानून का ज्ञान हो सकता है. उसके पास अनुभव भी हो सकता है और उसके इरादे भी अच्छे हो सकते हैं. लेकिन एक अच्छा वकील जज के सामने मामले का ऐसा पहलू रख सकता है, जो शायद जज की नजर से छूट गया हो. यही हमारी न्याय व्यवस्था की खूबसूरती है. वकील अपनी दलील देता है, जज उसे सुनता है. वकील अपनी बात से जज को समझाने की कोशिश करता है और जज उस पर फैसला देता है. आखिर में वकील और जज दोनों का उद्देश्य एक ही होता है न्याय.”उन्होंने कहा मैं वकीलों की स्वतंत्र रूप से पैरवी करने के अधिकार को बहुत महत्व देता हूं. एक वकील को अदालत में खड़े होकर सम्मान के साथ, लेकिन बिना किसी डर के यह कहने की आजादी होनी चाहिए- माई लॉर्ड, मेरा मानना है कि अदालत का फैसला सही नहीं है. और जज में इतनी समझ और परिपक्वता होनी चाहिए कि वह वकील की इस बात को व्यक्तिगत रूप से न ले. इसी तरह वकीलों को भी यह समझना चाहिए कि जज की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी होती है. कई बार जज को यह कहना पड़ सकता है वकील साहब, मैं आपकी दलील से सहमत नहीं हूं.”
हर हाई कोर्ट की अपनी अलग परंपरा होती है
चीफ जस्टिस ने कहा “मुझे मध्य प्रदेश की न्यायिक और कानूनी परंपराओं के अनुसार खुद को ढालना होगा. मैं यह बात केवल औपचारिकता या शिष्टाचार के लिए नहीं कह रहा हूं. मैं वास्तव में इस बात पर विश्वास करता हूं. हर हाई कोर्ट की अपनी अलग परंपरा होती है. उसकी अपनी कार्यशैली, अपनी सोच, अपनी बार और अपनी संस्थागत विरासत होती है. मैं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इन परंपराओं को समझना चाहता हूं.”
