छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए सरकार ने एक अधूरा काम पूरा किया
लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर विचार और उसे पारित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेपर लीक विरोधी विधेयक पेश किया और कहा कि पेपर लीक से जुड़े कानून को और सख्त बनाने के लिए यह संशोधन लाया गया है। जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि अलग-अलग पार्टियों की सरकारों वाले कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, और मोदी सरकार ने 2024 में परीक्षाओं में होने वाली गड़बडिय़ों को रोकने के लिए कानून लाने का अधूरा काम पूरा किया है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि 1992 में पहली बार कांग्रेस पार्टी की अगुवाई वाली भारत सरकार से एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश की गई थी। मोदी सरकार ने एक ऐसा काम पूरा किया है एक अधूरा कामजिसे आपको खुद पूरा करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पहले वाला बिल और आज का संशोधन, एक तरह से, देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए इस सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करते हैं। और साथ ही, यह प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प को भी दोहराता है कि ‘भारत माता’ के बच्चों के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। इसलिए, इस बिल को एक तरह से भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला कानून कहा जा सकता है। संसद में बिल पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सिंह ने कहा कि इस संशोधन का मकसद परीक्षा प्रणाली को मज़बूत करना, उसकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाना और यह पक्का करना है कि छात्रों को उनकी सच्ची और ईमानदार कोशिशों का फल मिले। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग सरकारों के समय में परीक्षाओं में पेपर लीक और दूसरी गड़बडिय़ों की घटनाएं हुई हैं, जिससे ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक व्यापक कानून की ज़रूरत महसूस हुई है।
लोकसभा में पेपर लीक बिल पेश