एमपी के बड़े शहरों में डिजिटल लर्निंग और सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती


बड़े शहर शिक्षा की गुणवत्ता में पिछड़े
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के संसाधन संपन्न जिले भी स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में राज्य के सर्वश्रेष्ठ जिले नहीं बन सके। केंद्र सरकार के परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फार डिस्ट्रिक्ट्स में प्रदेश के केवल सीधी और उज्जैन ही प्रचेष्टा-1 ग्रेड तक पहुंच सके, जबकि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े जिले प्रचेष्टा-2 ग्रेड में रहे।
रिपोर्ट बताती है कि बेहतर संसाधन, शहरीकरण और बड़े शिक्षा तंत्र के बावजूद बड़े जिले परिणाम, डिजिटल लर्निंग, कक्षा शिक्षण, स्कूल सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संयुक्त मूल्यांकन में शीर्ष में जगह नहीं बना सके। यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जारी की है। इसमें देश के 784 जिलों का मूल्यांकन 600 अंकों और 70 संकेतकों के आधार पर किया गया है। मूल्यांकन के लिए यू-डाइस प्लस, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024 और प्रबंध पोर्टल के आंकड़ों का उपयोग किया गया है। चारों बड़े शहरों के अंकों का विश्लेषण बताता है कि किसी एक क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन होने के बावजूद समग्र प्रदर्शन प्रभावित हुआ। भोपाल को 285 अंक मिले। शासन प्रक्रियाओं में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन रहा, लेकिन कुल स्कोर प्रचेष्टा-1 तक नहीं पहुंच सका। इंदौर 284 अंकों के साथ भोपाल से केवल एक अंक पीछे रहा। डिजिटल लर्निंग और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। ग्वालियर को 277 अंक मिले। जबलपुर 267 अंकों के साथ चारों प्रमुख शहरों में सबसे पीछे रहा। रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष भी देश का कोई भी जिला सर्वोच्च उत्कर्ष ग्रेड हासिल नहीं कर पाया। केवल 19 जिले उत्तम-2 तक पहुंचे, जबकि 97 जिले उत्तम-3 में रहे। सबसे अधिक 325 जिले प्रचेष्टा-1 तथा 307 जिले प्रचेष्टा-2 ग्रेड में आए। इसका मतलब है कि देश के अधिकांश जिलों की तरह मध्य प्रदेश के प्रमुख जिले भी अभी सुधार वाले समूह में हैं।

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