अगर अदालत बीच में चुनाव रोक दे तो पूरा चुनावी तंत्र ठप हो सकता है
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा नामांकन याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं और इसे खारिज किया जाता है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नटराजन के नामांकन पर उसकी टिप्पणियों का अधिकार क्षेत्र वाले हाई कोर्ट में दायर की जा सकने वाली किसी भी चुनाव याचिका पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
अदालत ने साफ कहा कि चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच अदालतें दखल नहीं दे सकतीं और इसके लिए संविधान में साफ रोक है। बेंच ने सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड पर रखे तथ्यों का जिक्र करते हुए कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का आदेश स्पष्ट रूप से बताता है कि अराजन द्वारा दिया गया फॉर्म 26 अधूरा था। चुनाव नामांकन के साथ जमा की जाने वाली इसी शपथपत्र-सदृश फॉर्म में उन्होंने एक लंबित आपराधिक शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। बेंच ने कहा कि जब तक चुनाव की प्रक्रिया जारी है, चाहे वह नामांकन, छंटनी, मतदान या मतगणना का चरण हो, अदालतें केवल अपवादस्वरूप ही हस्तक्षेप कर सकती हैं, वह भी तब, जब पूरी प्रक्रिया ही असंवैधानिक या अधिकार क्षेत्र से बाहर हो। इस मामले में अदालत ने ऐसा कोई असाधारण आधार नहीं पाया। अगर अदालत हर नामांकन विवाद या प्रक्रिया संबंधी शिकायत पर बीच में ही चुनाव रोक दे, तो पूरा चुनावी तंत्र ठप हो सकता है, जो लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर जैसी संस्थाओं को संवैधानिक जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अदालतों को केवल उन्हीं मामलों में तुरंत दखल देना चाहिए, जहां संवैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन हो, मगर सामान्य प्रक्रिया संबंधी असहमति को चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दी जानी चाहिए।
लोकतंत्र और संविधान के लिए एक आघात : नटराजन
मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र और संविधान के लिए झटका’ बताया। मीडिया से बात करते हुए नटराजन ने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत झटका नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान के लिए एक आघात है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग 48 घंटों तक कोई जवाब नहीं दे रहा था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कम से कम उनकी याचिका पर सुनवाई की। नटराजन ने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत झटका नहीं है। यह लोकतंत्र और भारत के संविधान के लिए एक झटका है। मैंने शुरू में ही कहा था कि चुनाव आयोग के सदस्य निष्पक्ष नहीं थे। जब हमारे लोग चुनाव आयोग के पास गए, तो उन्होंने 48 घंटों तक हमें कोई जवाब नहीं दिया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि समस्या मध्य प्रदेश राज्य से नहीं, बल्कि खुद चुनाव आयोग से है और रिटर्निंग ऑफिसर का काम करने का तरीका सबके सामने आ गया है।
मीनाक्षी नटराजन की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज