ब्रिक्स देशों की कड़ी चेतावनी, आतंकवाद को किसी भी धर्म या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए


आम नागरिकों और मानवीय सहायता कर्मियों पर हमले बर्दाश्त नहीं
नई दिल्ली: दो दिवसीय ब्रिक्स विदेश मंत्रियों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की बैठक में मंत्रियों ने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. शुक्रवार को बैठक के समापन पर अध्यक्ष का बयान जारी करते हुए भारत ने कहा कि ब्रिक्स सदस्यों ने अपने-अपने राष्ट्रीय रुख व्यक्त किए और विभिन्न दृष्टिकोण साझा किए.
बयान में कहा गया “सदस्यों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों में मौजूदा संकट के जल्द समाधान की आवश्यकता, बातचीत और कूटनीति के महत्व, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय कानून को बनाए रखने, अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से समुद्री व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह के महत्व तथा नागरिक बुनियादी ढांचे और नागरिक जीवन की सुरक्षा शामिल थी. कई सदस्यों ने वैश्विक आर्थिक स्थिति पर हाल के घटनाक्रमों के प्रभाव पर भी जोर दिया.” मंत्रियों ने दुनिया भर में मानवीय संकटों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही धीमी प्रतिक्रियाओं पर चिंता व्यक्त की. बयान में कहा गया अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सभी उल्लंघनों की कड़ी निंदा की, जिसमें नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए गए हमले शामिल हैं. इसके साथ ही, मानवीय सहायता पहुंचने से रोकने या बाधा डालने और मानवीय कर्मियों को निशाना बनाने की भी निंदा की गई. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सभी उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सम्मान, पालन और प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स सदस्यों द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को भी मान्यता दी.”भारत ने कहा कि मंत्रियों ने आतंकवाद के किसी भी कृत्य को आपराधिक और अनुचित बताते हुए उसकी कड़ी निंदा की, चाहे उसकी वजह कुछ भी हो और उसे कब, कहां और किसके द्वारा भी अंजाम दिया गया हो. उन्होंने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे. आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी गतिविधियों और उन्हें बढ़ावा देने में शामिल सभी लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और उन्हें प्रासंगिक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए.

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