देश में लेन ड्राइविंग का सिस्टम नहीं:सुप्रीम कोर्ट

राज्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाडिय़ों में ट्रैकिंग डिवाइस लगवाएं
नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते सडक़ हादसों को लेकर कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। यही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। कोर्ट ने सडक़ सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश भी जारी किए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाडिय़ों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि ये उपकरण खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। केंद्र सरकार ने 2018 में ही यह नियम लागू किया था, लेकिन अब तक केवल करीब 1त्न वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 2012 में दायर सर्जन एस. राजशेखरन की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में देशभर में सडक़ सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कोई भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ी तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं पाएगा, जब तक उसमें पैनिक बटन नहीं लगे होंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को गाड़ी निर्माताओं के साथ बातचीत करने का निर्देश भी दिया, ताकि प्रोडक्शन के समय ही ये डिवाइस लगाए जाएं। ट्रैकिंग डिवाइस और उनकी कार्यक्षमता को वाहन डेटाबेस से जोड़ा जाए, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। पुराने वाहनों में भी यह सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पीड लिमिटिंग डिवाइस को लेकर राज्यों की ढिलाई पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर होना जरूरी है। कोर्ट ने राज्यों को अगली सुनवाई तक डिटेल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले के आदेशों के बावजूद अब तक रोड सेफ्टी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को अंतिम मौका दिया गया और कहा गया कि तीन महीने के भीतर बोर्ड का गठन किया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *