मध्य प्रदेश के जेलों की चौंकाने वाली सच्चाई


138 मासूम बिना जुर्म हैं बंद
जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी
भोपाल : जेल की सजा अपराध करने वालों को मिलती है, लेकिन मध्यप्रदेश की जेलों में 138 ऐसे मासूम भी बंद हैं, जिन्होंने कोई अपराध ही नहीं किया. वे जेलों के अंदर सिर्फ इसलिए हैं, क्योंकि उनकी मां को अपराध की सजा मिल चुकी है या फिर उन्हें कोर्ट के फैसले का इंतजार है. देश में ऐसे बच्चों की संख्या 1354 है.
एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट से पता चला है कि मध्यप्रदेश की जेलों कुल क्षमता से डेढ़ गुना ज्यादा कैदी रखे गए हैं. इनमें 804 दूसरे राज्यों के भी हैं, जो मध्यप्रदेश के जेलों में बंद हैं. इसके अलावा 23 विदेशी कैदी भी प्रदेश की जेलों में बंद हैं. मध्यप्रदेश में राजस्थान और तमिलनाडु के बाद सबसे ज्यादा जेलें मौजूद हैं, लेकिन इसके बाद भी प्रदेश की जेलों में कैदी नहीं समा रहे. मध्यप्रदेश की जेलों में डेढ़ गुना ज्यादा कैदी रखे गए हैं. प्रदेश की 133 जेलों में सिर्फ 30 हजार 644 कैदियों के लिए ही जगह हैं, लेकिन इसके मुकाबले 45 हजार 92 कैदी बंद हैं. मध्यप्रदेश की जेलों की यह स्थिति एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों से सामने आई है. इनमें सजायाफ्ता कैदियों की संख्या सिर्फ 21 हजार 760 हैं यानी 23 हजार से ज्यादा कैदी विचाराधीन है, जिनकी कोर्ट में सुनवाई चल रही है और कोर्ट का फैसला होना बाकी है. देश में मध्यप्रदेश की जेलों में उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद सबसे ज्यादा कैदी बंद हैं, इनमें 16 फीसदी यानी 21 हजार 760 कैदी सजायाफ्ता हैं.
मां ने किया अपराध, 138 बच्चे भी काट रहे सजा
मध्यप्रदेश की जेलों में महिला बंदियों की संख्या 1915 है. इनमें सजा काटने वाले महिला अपराधी 938 हैं, जो अलग-अलग अपराधों की सजा काट रही हैं. इसके अलावा 977 ऐसी महिलाएं हैं, जो अंडरट्रायल हैं. उधर मां के साथ जेलों में साथ रह रहे बच्चे भी हैं. प्रदेश की जेलों में 138 बच्चे ऐसे हैं, जो जेलों में ही मां के साथ दिन काट रहे हैं. मध्यप्रदेश की जेलों में अनपढ़ अपराधियों की संख्या 4 हजार 564 है. जेल में सजा काट रहे कैदियों में सबसे कम संख्या पोस्ट ग्रेजुएट्स की है. मध्यप्रदेश की जेलों में 283 पोस्टग्रेजुएट बंद हैं. जबकि टेक्नीकल डिग्री डिप्लोमा करने वाले अपराधी सिर्फ 176 हैं. पूरे देश की जेलों में ऐसे 1791 अपराधी हैं. जबकि कक्षा 10वीं से कम शिक्षा वाले सजायाफ्ता कैदियों की संख्या मध्यप्रदेश में 11 हजार 62 है.

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