खरीफ फसलों का रूस्क्क बढ़ाने को भी मंजूरी दी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कोयले से गैस बनाने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी गयी। सरकार का मानना है कि अगले चार से पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर कोयले से गैस का उत्पादन शुरू होने पर भारत गैस के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा और उसे वर्तमान जैसी वैश्विक आपूर्ति चुनौतियों तथा आयात निर्भरता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिये 37 हजार 500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देना है। इसके तहत लगभग 7 करोड़ 50 लाख टन कोयला और लिग्नाइट के गैसीकरण का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और एलएनजी, यूरिया, अमोनिया तथा मेथनाल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। योजना के अंतर्गत संयंत्र और मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जायेगा। किसी एक परियोजना के लिये पांच हजार करोड़ रुपये तक की सीमा तय की गयी है। सरकार ने यह भी फैसला किया है कि गैसीकरण परियोजनाओं के लिये कोयला आपूर्ति अवधि को बढ़ाकर 30 वर्ष किया जायेगा ताकि निवेशकों को दीर्घकालिक स्थिरता मिल सके। इस योजना से लगभग ढाई से तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है और करीब 50 हजार प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। सरकार के अनुसार इससे राज्यों को हर वर्ष लगभग छह हजार 300 करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त होगा। मंत्रिमंडल की बैठक में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिये 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को भी मंजूरी दी गयी। सरकार ने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। अरहर का समर्थन मूल्य 8450 रुपये, मूंग का 8780 रुपये और उड़द का 8200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने गुजरात में अहमदाबाद के सरखेज से धोलेरा तक सेमी हाई स्पीड डबल रेल लाइन परियोजना को भी मंजूरी दी। करीब 20 हजार 667 करोड़ रुपये लागत वाली यह परियोजना वर्ष 2030-31 तक पूरी की जायेगी। यह भारतीय रेल की पहली सेमी हाई स्पीड परियोजना होगी, जिसमें स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया जायेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने साथ ही नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उन्नयन और आधुनिकीकरण को भी मंजूरी दी।
देश में अब कोयले से बनेगी गैस, केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दी गयी मंजूरी