नई दिल्ली: भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की पुस्तकों का विमोचन हुआ। भारत मंडपम में हुए कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संस्थागत संतुलन के बारे में भी बात की और कहा कि लोकतंत्र की ताकत टकराव के बजाय आपसी सम्मान में निहित है। गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 76 सालों में भारत में संवैधानिक मर्यादाएं और संस्थागत सीमाएं बरकरार रही हैं।
अमित शाह ने कहा “यह हम सभी के लिए अत्यंत संतोष की बात है कि हमारे देश में संवैधानिक मानदंड और संस्थागत मर्यादाएं बरकरार हैं और परंपराओं और रीति-रिवाजों के माध्यम से हमने इन्हें और मजबूत करना जारी रखा है।” शाह के अनुसार, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच दशकों से कायम संतुलन को और मजबूत किया जाना चाहिए।
अदालतें केवल गंभीरता का स्थान नहीं :सीजेआई
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ये किताबें सिर्फ मजाकिया किस्सों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि कानून की कठोर संरचना के भीतर भी इंसानी भावनाएं और हास्य झलकते हैं। उन्होंने कहा कि हर कानूनी दस्तावेज, हर सुनवाई और हर फैसला आखिरकार इंसानों से ही जुड़ा होता है, जिनमें अपनी खूबियां और कमजोरियां दोनों होती हैं। मजाकिया अंदाज में सुझाव दिया कि तुषार मेहता को भारतीय न्याय व्यवस्था पर भी एक किताब लिखनी चाहिए, क्योंकि यहां हास्यप्रद किस्सों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की अदालतों में ही इतना कंटेंट है कि एक पूरी लाइब्रेरी तैयार हो सकती है। सीजेआई ने कहा कि अदालतें केवल गंभीरता का स्थान नहीं हैं, बल्कि वहां नाटक, तर्क और हास्य का अनोखा संगम भी देखने को मिलता है। जजों और वकीलों के बीच चलने वाली यह प्रक्रिया कभी-कभी बेहद रोचक मोड़ ले लेती है।
लोकतंत्र की ताकत टकराव के बजाय आपसी सम्मान में निहित:अमित शाह