देश की जेलों में घटी एससी-एसटी और मुस्लिम कैदियों की संख्या

एनसीआरबी के आंकड़ों में मिले बदलाव के संकेत
नई दिल्ली

राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारतीय जेलों के भीतर महत्वपूर्ण बदलावों के संकेत मिल रहे हैं। जेलों के जनसांख्यिकी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो दशकों में जेल की डेमोग्राफी में मुसलमानों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनसजातियों की संख्या तेजी से घटा है। 2024 के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि दोषियों और विचाराधीन कैदियों दोनों में उनका अनुपात दो दशकों से अधिक समय में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
जेलों में बंद कैदियों की संख्या के एक दशक लंबे विश्लेषण से पता चलता है कि जेलों में मुसलमानों के आनुपातिक प्रतिनिधित्व में धीरे-धीरे गिरावट आई है, जबकि 2013 के बाद से कैदियों की कुल संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। 2024 रिपोर्ट के अनुसार 2013 में देश के 1,29,608 दोषियों में से 22,145 मुस्लिम थे। 2024 तक दोषियों की कुल संख्या बढक़र 1,36,138 हो गई लेकिन मुस्लिम दोषियों की संख्या में मामूली गिरावट आई और यह घटकर 21,640 रह गई। 2013 में भारत के 2,78,503 विचाराधीन कैदियों में से 57,936 मुस्लिम थे। 2024 तक हालांकि मुस्लिम विचाराधीन कैदियों की संख्या बढक़र 69,864 हो गई थी, लेकिन कुल विचाराधीन कैदियों की संख्या बढक़र 3,71,440 हो जाने के कारण उनकी हिस्सेदारी घटकर 18.81 प्रतिशत रह गई। आंकड़ों से पता चलता है कि यद्यपि मुस्लिम कैदियों की संख्या पूर्ण रूप से स्थिर रही है या उसमें मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन उनकी वृद्धि पिछले दशक में भारत की जेल आबादी में हुई तीव्र वृद्धि के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है। 2024 में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 5,818 मुस्लिम कैदी दर्ज किए गए, उसके बाद मध्य प्रदेश में 2,378 और पश्चिम बंगाल में 1,836 कैदी थे। विचाराधीन कैदियों में भी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 16,471 मुस्लिम कैदी थे, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 8,423 और बिहार में 6,685 कैदी थे।

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