सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां कीं, हम लोकतंत्र को हाईजैक नहीं करने दे सकते

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने श्रृंगेरी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा को विधायक पद से हटाए जाने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और उन्हें अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि वे फिलहाल इस सीट के विधायक बने रहेंगे, जबकि हाल ही में हुई मतगणना में बीजेपी उम्मीदवार डी.एन. जीवराज को विजेता घोषित किया गया है।
जस्टिस संजय कुमार और के विनोद चंद्रन की पीठ ने बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ कुछ कड़ी टिप्पणियां भी कीं। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा “हम आपको इस तरह लोकतंत्र का अपहरण नहीं करने दे सकते। राजेगौड़ा श्रृंगेरी के विधायक के रूप में अपना कार्यकाल जारी रखेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि राजेगौड़ा फिलहाल विधायक बने रहेंगे और उन्हें विधायक के रूप में बहाल करने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया। डीएन जीवराज पर पोस्टल बैलेट में छेड़छाड़ का एक आपराधिक मामला भी दर्ज है।
दो महीने में पूरी हो न्यायिक अधिकारियों से हुई हिंसा की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को बड़ा आदेश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक अप्रैल 2026 को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कार्यरत न्यायिक अधिकारियों का घेराव और हिंसा के मामले की जांच 2 महीने के अंदर पूरी करने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि एनआईए को जांच पूरी करने के बाद सक्षम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए। पीठ ने पूछा “जांच की क्या स्थिति है? क्या यह पूरी हो चुकी है?
हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए ऑटोमैटिक लिस्टिंग सिस्टम बने
सुप्रीम कोर्ट ने देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि जमानत मामलों की जल्दी सुनवाई और फैसला करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनानी जरूरी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इसके लिए पेंडिंग बेल याचिकाओं की ऑटोमैटिक लिस्टिंग का सिस्टम तैयार किया जाए और मामलों के निपटारे की तय समय सीमा भी होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट, राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार करें, जिससे जमानत मामलों का समय पर फैसला हो सके। उसका मकसद किसी हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को और बेहतर बनाना है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक समिति को सुझाव दिया कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई के लिए पहले से तय तारीख देने की व्यवस्था बनाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नशीले पदार्थों के कानून से जुड़े मामलों में एफएसएल रिपोर्ट समय पर मिलना बहुत जरूरी है। जांच अधिकारियों की जिम्मेदारी भी अहम होती है, खासकर पीडि़तों से जुड़े मामलों में। जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पीडि़तों को सुनवाई में शामिल होने और कानूनी मदद लेने का पूरा मौका मिले।

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