ग्वालियर: हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अब अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान खुद से प्राचार्य और प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति कर सकेंगे. हाईकोर्ट की युगलपीठ ने स्पष्ट कहा है कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान को प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति खुद करने का संवैधानिक अधिकार है और राज्य शासन वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति का नियम इन संस्थानों पर लागू नहीं कर सकती है. साथ ही कहा है कि यदि एक बार संस्थान द्वारा किसी योग्य व्यक्ति का चयन कर लिया जाता है तो उसकी उपयुक्तता पर न्यायालय और सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी.कोर्ट रूम में न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की है कि प्राचार्य की भूमिका किसी भी शिक्षण संस्थान में केंद्रीय होती है, वह शिक्षण संस्थान में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और प्रशासन को सुनिश्चित करता है. ऐसे में संस्थान इस बात के लिए स्वतंत्र होना चाहिए कि वह अपनी योग्यता और उपयुक्तता के आधार पर योग्य व्यक्ति का चुनाव करे. भले ही वह व्यक्ति कनिष्ठ हो या वरिष्ठ.
यत्र तत्र सर्वत्र