आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों को भाजपा में विलय की मंजूरी, राज्यसभा में भाजपा सांसद 113 हुए


नई दिल्ली

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी के सात बागी सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की संख्या घटकर 3 रह गई है, जबकिभाजपा सांसदों की संख्या 106 से बढक़र 113 हो गई है। जो सात सांसद भाजपा में शामिल हुए हैं, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं।
आम आदमी पार्टी ने सभापति से सातों सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी। संजय सिंह ने भी लेटर लिखकर उन्हें दलबदल कानून के उल्लंघन का दोषी बताते हुए अयोग्य घोषित करने की अपील की। कपिल सिब्बल ने कहा था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक सबसे पहले पार्टी को प्रस्ताव पास करके दूसरी पार्टी विलय करना पड़ेगा। कोई भी सांसद दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते। 245 सदस्यीय सदन में एनडीए के राज्यसभा में कुल 147 सदस्य हो गए हैं जबकि इंडिया एलायंस के 78 सदस्य हैं। वहीं अन्य दलों के 19 सदस्य हैं। राज्यसभा में साधारण बिल के लिए 123 सांसदों का समर्थन चाहिए। लेकिन जब संविधान में संशोधन करना होता है तब दो तिहाई बहुमत चाहिए होता है। इसके लिए 164 सांसदों का समर्थन जरूरी है। अब एनडीए 164 के आंकड़े से महज 17 कदम दूर है
इन सांसदों ने कभी भी अनुशासनहीन व्यवहार नहीं किया :रिजिजू
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि इन सांसदों ने संसद में हमेशा मर्यादित व्यवहार बनाए रखा और कभी भी असंसदीय भाषा या अनुशासनहीनता का सहारा नहीं लिया। रिजिजू ने कहा कि राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने इन सात सांसदों के विलय को मंजूरी दे दी है। अब राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी आधिकारिक रूप से बीजेपी संसदीय दल का हिस्सा बन गए हैं। रिजिजू ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक इन सांसदों के कामकाज पर नजर रखी है और पाया है कि इन्होंने कभी भी अपमानजनक भाषा या अनुशासनहीन व्यवहार नहीं किया।
चंद भ्रष्ट लोगों के हाथ में सिमटी आप :राघव
राघव चड्ढा ने भाजपा में शामिल होने के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि आप अब पहले जैसी नहीं रही और वहां काम करने का माहौल विषाक्त हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में बोलने और काम करने से रोका जाता था तथा कुछ भ्रष्ट लोगों का प्रभाव बढ़ गया था। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने से पहले मैं एक चार्टर्ड अकाउंटेंट था, मेरे सामने एक बेहतरीन करियर था, मैं उस करियर को छोडक़र राजनीति में आया। अपने करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। और एक राजनीतिक पार्टी का संस्थापक सदस्य बना। मैंने अपने युवा जीवन के 15 साल दिए, अपने खून, पसीना से बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा। लेकिन आज ये पार्टी पार्टी वो पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक कार्य का माहौल है,काम करने से रोका जाता है। संसद में बोलने से रोका जाता है। और आज ये राजनीतिक पार्टी चंद भ्रष्ट और समझौता करने वाले लोगों को हाथ में फंस कर रह गई है।

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