अहमदाबाद : सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि न्याय व्यवस्था को समाज की बदलती जरूरतों और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया को मजबूत करने में डिजिटल उपकरणों की भूमिका पर जोर दिया।
जस्टिस नाथ ने कहा हमारे जैसे सांविधानिक लोकतंत्र में न्यायपालिका की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। न्यायपालिका सिर्फ निर्णय देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि एक ऐसी संस्था है जो अधिकारों की रक्षा करती है, कानून के शासन को कायम रखती है और शासन में जनता के विश्वास को मजबूत करती है। इस संस्था की वैधता न सिर्फ इसके निर्णयों की सटीकता पर निर्भर करती है बल्कि इसकी सुलभता, दक्षता और जवाबदेही बनाए रखने की क्षमता पर भी निर्भर करती है। उन्होंने कहा न्याय व्यवस्था को नया रूप देना हमारे मूलभूत सिद्धांतों से विमुख होना नहीं है, बल्कि समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप ढलकर उन्हें और मजबूत करना है। जस्टिस नाथ ने कहा जज का काम सिर्फ न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए कानून, तथ्यों और समाज की व्यापक धाराओं से निरंतर जुड़ाव आवश्यक है। एक जज केवल कानून का विद्यार्थी नहीं होता, वह जीवन का विद्यार्थी होता है, जो निरंतर सीखता, पुरानी धारणाओं को भुलाता और विकसित होता रहता है। पूर्वाग्रहों के बोझ के बिना प्रत्येक मामले को नए दृष्टिकोण से देखने की क्षमता निष्पक्ष न्याय प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जज का काम सिर्फ न्यायालय तक सीमित नहीं :जस्टिस विक्रम नाथ