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प्रदेश में दोगुना करेंगे मत्स्य उत्पादन : डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के साथ कॉन्क्लेव का किया शुभारंभ

मध्यप्रदेश में लाएंगे नई नीली क्रांति, जलस्रोतों को बनाएंगे बहु आयामी का स्रोत
मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन में बनायेंगे देश का अग्रणी केन्द्र
मत्स्य पालन उद्योग को जोड़ा जाएगा फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के साथ
मत्स्योद्योग को एमएसएमई इंडस्ट्री से जोडक़र देंगे प्रोत्साहन और इन्सेंटिव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 में यह प्रावधान किया है कि प्रदेश का मत्स्य उत्पादन हम जल्द से जल्द दोगुना कर देंगे। इससे मत्स्य उत्पादकों, विक्रेताओं, मत्स्य परिवहनकर्ताओं और मछली पालन से जुड़े सभी मत्स्यपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार मध्यप्रदेश में नई नीली क्रांति लाने के लिए तैयार है। मप्र की जल सम्पदा को निवेश, नवाचार और निर्यात से जोडक़र हम मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन के मामले में देश का अग्रणी केन्द्र बनाएंगे। मध्यप्रदेश में उपलब्ध अथाह जलराशि का बेहतर सप्रबंधन कर जलचरों का संरक्षण भी कर रहे हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां कई बड़ी जल संरचनाएं मौजूद हैं। मध्यप्रदेश में उपलब्ध जल स्रोतों को बहु आय जलस्रोत बनाने जा रहे हैं। एक जल स्रोत से लोगों को पीने का पानी, किसानों को खेती के लिए पानी, पशुपालकों को पशुओं के लिए पानी, मछली उत्पादन, जल पर्यटन सहित जलीय जीवों को भी संरक्षण मिलता है। किसानों और मत्स्य पालकों दोनों की आर्थिक स्थिति हालत सुधारने के लिए राज्य सरकार इस दिशा में ठोस काम कर रही है। मुख्यमंत्री कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आय़ोजित नेशनल फिशरीज़ इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कान्क्लेव-2026 में आए प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति अतंर्गत प्रदेश में 1 लाख नए केज़ कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य लिया है। प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में भी बड़े तालाब निर्मित करेंगे, ताकि वन्य जीवों के साथ-साथ इन तालाबों का लाभ मत्स्यपालकों को भी मिले। डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन उद्योग को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के साथ जोड़ा जाएगा। इसके अंतर्गत मछली उत्पादन के बाद इसके प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, मार्केटिंग संबंधी अन्य सभी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। डॉ. यादव ने कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग को एमएसएमई इंडस्ट्री से जोडक़र सभी प्रकार के प्रोत्साहन और इन्सेंटिव भी दिया जाएगा। मत्स्य उत्पादकों एवं निवेशकों को सभी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में लागू एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के अंतर्गत मत्स्य उद्योग के विस्तार के लिए इस क्षेत्र के निवेशकों को भूमि आवंटन, तकनीकी मदद और अन्य कई प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी। डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के सभी विभागों में अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। देश के निर्यात होने वाली मत्स्य सम्पदा पर अमेरिका ने टैरिफ लगाया तो यह संकट का समय था, लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने नेतृत्व कौशल, क्षमता और योग्यता के बल पर देश को इस संकट से बाहर निकाला। मत्स्य उद्योग निवेश, उत्पादन और निर्यात का बड़ा सेक्टर है, जिसमें आगे बढऩे की अपार संभावनाएं मध्यप्रदेश में विद्यमान हैं। फिशरीज़ सेक्टर में निवेशक, निर्यातक, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल स्रोतों का बेहतर प्रबंधन करते हुए खेती के लिए निरंतर सिंचाई सुविधाओं को बढ़ा रही है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढक़र 69 लाख हैक्टेयर हो चुका है। राज्य सरकार ने इसे 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हमारा प्रयास है कि सभी नदियों में जलीय जीवों की उपलब्धता हो, इसीलिए नर्मदा नदी में 6 मगरमच्छ छोड़े गए हैं। डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने एक लाख केज कल्चर प्रोजेक्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री ने म.प्र. की समृद्धि का लिया है संकल्प : केन्द्रीय मंत्री
केंद्रीय पंचायती राज, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को बदलने का संकल्प लिया है। इस आयोजन में मत्स्य पालक, निवेशक और निर्यातक एक मंच पर आए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मछुआ कल्याण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की। भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देशभर में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया। भारत सरकार की योजनाओं से मछुआरो को क्रेडिट कार्ड मिले हैं। आज हम दुनिया के 130 देशों में मत्स्य निर्यात कर रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि राज्य की एकीकृत मत्स्य उत्पादन नीति-2026 अत्यंत सराहनीय पहल है। यह मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि कैसे मध्यप्रदेश को मत्स्य उद्योग में बढ़ाया जाए और इनलैंड स्टेट्स में मत्स्य निर्यात का नेतृत्व किया जाए।
प्रधानमंत्री का संदेश किसानों की आय को करना है दोगुना : सिंह
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किसानों की आय को दोगुना करने का संदेश दिया है। इसे खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, फूलों की खेती, औषधीय खेती और जैविक खेती के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। मत्स्य पालन विभाग किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश में नर्मदा, शिप्रा जैसी नदियां, जलाशय और डैम हैं। इंदिरा सागर जलाशय में एक लाख केज स्थापित करने से देश में अनुपम उदाहरण बनेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत कर क्रांतिकारी कदम उठाया है। भारत दुग्ध उत्पादन और मत्स्य उत्पादन में अग्रणी राष्ट्र है। देश ने एनीमल हसबेंड्री, फिशरीज और डेयरी सेक्टर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
मत्स्य उद्योग को बढ़ाने में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका होगी : लिखी
केन्द्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र देश के 6 करोड़ मछुआरों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही खाद्य एवं पोषण सुरक्षा और सी-फूड निर्यात में भी अहम है। भारत ने वैश्विक स्तर पर मछली पालन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मत्स्य उद्योग को बढ़ाने में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य की मत्स्य उद्योग नीति-2026 मत्स्य पालन को आगे बढ़ाने में क्रांतिकारी सिद्ध होगी।

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