पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले पूरी आयोग की सर्वसम्मति से हुए
नई दिल्ली:चुनाव आयोग नेअपने प्रेस नोट में कहा “अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्थान में चर्चा का सामान्य हिस्सा हैं।” आयोग के मुताबिक अंतिम फैसला लिए जाने से पहले लिखित नोट्स, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच जैसी प्रक्रियाएं सामान्य रूप से चलती रहती हैं। आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए थे।
आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में उसने कई फैसले लिए, निर्देश जारी किए, करीब 40 नई पहल शुरू कीं और कई चुनावी सुधार किए। इनमें देशभर में मतदाता सूची की जांच और उसमें सुधार की प्रक्रिया भी शामिल है, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया। आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में लिए गए ये सभी फैसले पूरी आयोग के सर्वसम्मत निर्णय का नतीजा हैं। आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि में लिखी गई कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों को सामने रखकर बाकी मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। मतदाता सॉफ्टवेयर को लेकर आयोग ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा नियमों के तहत काम करते हैं, ताकि बिना अनुमति के किसी तरह का बदलाव न किया जा सके। आयोग का कहना है कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले पूरी आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। ऐसे में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से रिकॉर्ड में दर्ज की गई आपत्तियां अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में किस तरह शामिल हुईं, यह सवाल अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

