नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की नवनियुक्त महामंत्री स्मृति ईरानी का कहना है कि राजनीति को लेकर मेरा नजरिया थोड़ा अलग रहा है। ज्यादातर लोग राजनीति में सत्ता और पद पर बने रहने के लिए आते हैं, लेकिन मैंने भाजपा के साधारण कार्यकर्ता के रूप में वर्षों विपक्ष का दौर देखा है।
स्मृति ईरानी ने कहा कि पार्टी ने जब भी जो भी करने को कहा मैंने किया। कोई मूर्ख ही होगा जो कांग्रेस के गढ़ अमेठी में जाकर चुनाव लडऩे की सोचेगा, पार्टी ने मुझे वहां भेजा और मैंने चुनाव लड़ा। जहां तक टीवी पर लौटने की बात है तो मैंने करीब बीस साल टीवी का शिखर देखा, अपनी मेहनत से कमाने में कोई हर्ज नहीं है। पार्टी ने मुझे छोड़ा कहां था जो मेरी उम्मीद टूटती, मैं लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होती रही। दरअसल गांधी परिवार तो अमेठी में चुनाव लडऩे आया ही नहीं, अगर भरोसा होता तो वायनाड की बजाय अमेठी से लड़ते। हार-जीत दोनों राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और शेखी वो बघारते हैं जो अपने पिता की पैतृक सीट या सेफ सीट से लड़ते हैं। मैं कहती हूं कि वहां से लडक़र देखो जहां तुम्हारी कभी दाल नहीं गली है। हम तब सिर पर कफन बांधकर अमेठी गए थे जब केंद्र में यूपीए और राज्य में मुलायम सिंह यादव के दल की सरकार थी। ईरानी ने कहा कि चर्चा तब होती है जब कोई जंतर मंतर पर खड़ा होकर प्रधानमंत्री को गाली देता है। देश में कई ऐसे तत्व हैं जो चाहते हैं कि देश अब आयु के आधार पर बंटे, हमारा दायित्व है कि हम ऐसा न होने दें।

