देश कोई धर्मशाला नहीं
नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह देश कोई धर्मशाला नहीं है। यहां रहने का अधिकार केवल नागरिकों को है। घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा हैं। हमारा लक्ष्य देश को इन घुसपैठियों से मुक्त करना है। शाह ने कहा कि उन्होंने पिछले आठ महीनों में सभी बॉर्डर स्टेट का दौरा किया है।
शाह ने कहा कि सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के तीन बड़े केंद्रों- नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद से जुड़ी चुनौतियां खत्म कर दी हैं। इसका श्रेय सभी राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों को जाता है। अगर पिछली सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं को गंभीर होने से पहले समझ लिया होता, तो देश को दशकों तक इनका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता। 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से वापस लाया गया है। सभी राज्य लक्ष्य तय करें कि विदेश में बैठे भगोड़ों को देश के कानून के दायरे में लाया जाए। मोदी सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर को भी अपग्रेड किया है, ताकि यह कई स्तरों पर नतीजे देने वाला प्लेटफॉर्म बन सके। एक साल में तीनों नए कानून 100 फीसदी लागू होंगे। इससे आपराधिक मामलों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में हो सकेगा और सजा की दर 25 फीसदी बढ़ेगी। युवा अधिकारी डेटा को जोडक़र, उसका एनालिसिस करके और अपराध करने के तरीकों की पहचान कर काम की खुफिया जानकारी तैयार करें। इससे भविष्य की चुनौतियों को रोका जा सकेगा।
