एक देश, एक चुनाव’ राष्ट्रीय और जनहित के लिए ज़रूरी
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का विरोध करने वाले कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम पर पलटवार किया। उन्होंने तर्क दिया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव पहले एक साथ ही होते थे, लेकिन तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस ने इस व्यवस्था को बिगाड़ दिया।
शिवराज चौहान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने 1970 के दशक में असंवैधानिक तरीकों से विपक्ष की चुनी हुई सरकारों को गिराया था। पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव पहले एक साथ ही होते थे ऐसा 1952, 1957, 1962 और 1967 में हुआ था। बाद में कांग्रेस पार्टी ने असंवैधानिक तरीकों से विपक्ष की चुनी हुई सरकारों को गिराने की साजिश रची और इस व्यवस्था को बिगाड़ दिया। चौहान ने कहा कि लॉ कमीशन ने कई बार और पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी ने एक साथ चुनाव कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि 1983 में लॉ कमीशन ने कहा था कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना ज़रूरी है। चुनाव आयोग की भी यही राय थी। लॉ कमीशन ने 2018 में फिर से यही बात दोहराई। तो फिर यह असंवैधानिक कैसे हो गया? पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अगुवाई वाली कमेटी ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की ज़रूरत पर रिपोर्ट तैयार करने से पहले देश भर के बुद्धिजीवियों और कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत की। इस प्रस्ताव में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने और उसके बाद 100 दिनों के भीतर अन्य चुनाव कराने का सुझाव दिया गया है।
जनता भी ‘एक देश, एक चुनाव’ चाहती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश भर में बार-बार होने वाले चुनावों के कारण चुने हुए नेता विकास कार्यों पर समय नहीं दे पाते हैं। उन्होंने दावा किया कि ज़्यादातर जनता भी ‘एक देश, एक चुनाव’ चाहती है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से न केवल सरकार और राजनीतिक दलों का खर्च बढ़ा है, बल्कि विकास में भी बाधा आई है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और पार्टी कार्यकर्ता चुनावों में बहुत ज़्यादा समय लगाते हैं। शिक्षक, राजस्व विभाग के कर्मचारी, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी – जनसेवा, कल्याण और विकास पर ध्यान देने के बजाय सिफऱ् चुनाव की तैयारियों में ही लगे रहते हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने चाहिए। एक देश, एक चुनाव’ राष्ट्रीय और जनहित के लिए ज़रूरी है।
