दान का एक-एक पैसा भगवान का, बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि दान का एक-एक रुपया श्री बांके बिहारी मंदिर की दान पेटियों और ऑनलाइन खजाने में ही जाना चाहिए. शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि दान की राशि में किसी भी तरह की हेराफेरी या रुकावट को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा. कोर्ट ने वृंदावन मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए ये बातें कहीं.
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि दान का एक-एक पैसा दान पेटियों और मंदिर के ऑनलाइन खजाने में ही आना चाहिए, और पुजारियों या किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा इसमें डाली गई कोई भी बाधा बेहद गंभीरता से देखी जाएगी. पीठ ने मंदिर की प्रबंधन समिति को दान प्राप्त करने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली शुरू करने और गलत प्रथाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी निर्देश दिया. पीठ ने टिप्पणी की “सबसे पहले, दान समर्पण में जाना चाहिए, यानी देवता को. और उसमें से आपको भंडारी कर्तव्यों के हिस्से के रूप में अपना हिस्सा मिलेगा.” पीठ ने स्पष्ट कहा कि कोई भी पुजारी या सेवायत देवता के धन को तब तक सीधे अपने लिए उपलब्ध नहीं मान सकता, जब तक कि उसे पहले देवता को अर्पित न कर दिया जाए.
पैनल को अपना काम करने दें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में 20 जुलाई के विरोध-प्रदर्शन के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी को अपनी जांच जारी रखने दी जानी चाहिए। सीजेआई ने कहा जो भी काम करेगा, वह इस कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगा। हमने इस मामले का निपटारा नहीं किया है और हम हर चीज़ पर नजऱ रखेंगे। कोर्ट ने कहा कि वे कमेटी को अपना काम शुरू करने दें और जांच आगे बढऩे के साथ-साथ अपनी कोई भी चिंता कोर्ट के सामने रखें। सीजेआई ने कहा कि कभी-कभी हमें कुछ सीमाओं, जैसे उपलब्धता और अन्य कारकों के दायरे में भी काम करना पड़ता है। उन्हें काम करने दें और देखें कि वे कैसा प्रदर्शन करते हैं।
फुटपाथ पर पहला हक पैदल चलने वालों का
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फुटपाथ मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और सडक़ों पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित व स्पष्ट रूप से चिह्नित जगह होना जरूरी है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि जहां सडक़ है, वहां पैदल यात्रियों के लिए अलग और स्पष्ट जगह होनी चाहिए। उस पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए और वाहन मार्ग से उसे सुरक्षित तरीके से अलग किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को बिना डर चलने का भरोसा हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फुटपाथ पर पैदल चलने वालों का अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही से ऊपर है। कोर्ट के मुताबिक नगर निकायों, शहरी विकास प्राधिकरणों और पंचायतों की जिम्मेदारी है कि वे फुटपाथ का निर्माण, सीमांकन और रखरखाव करें और उन्हें अतिक्रमण से बचाएं। फुटपाथ के अधिकार के उल्लंघन पर नागरिक सांविधानिक और कानूनी उपाय के साथ मुआवजे की मांग भी कर सकते हैं।

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