वंदे मातरम के पूरे गान से क्यों परहेज?
सिलीगुड़ी । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी की आलोचना की कि उसने आज़ादी के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को पूरे दिल से नहीं अपनाया। पश्चिम बंगाल में एक कार्यक्रम में बोलते हुए शाह ने कहा कि 150 साल बाद और हमारी आज़ादी के 80वें साल में, देश और दुनिया ने लाल किले से ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन सुना।
शाह ने कहा कि इस एक गीत, इस एक साहित्यिक रचना के ज़रिए उन्होंने यह स्थापित किया कि आज़ाद भारत को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपनाकर आगे बढऩा चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी और देश के बँटवारे के बाद भी ‘वंदे मातरम’ को कभी पूरे दिल से नहीं अपनाया गया। गृह मंत्री ने ‘राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण संशोधन अधिनियम को मज़बूत करने के फ़ैसले को ऐतिहासिक निर्णय भी बताया। यह कानून राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ में किसी भी तरह की बाधा डालने या उसका अपमान करने को अपराध बनाता है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने संसद में एक बिल पेश किया और ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन को सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने का फ़ैसला किया; यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। मेरा मानना ??है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि आने वाली पीढिय़ों हमारे बच्चों, किशोरों और युवाओं—तक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का अमर संदेश पहुँचेगा। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के 1937 के फैसले ने उन हालात को बनाने में भूमिका निभाई, जिनकी वजह से भारत का विभाजन हुआ।
