नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि देश की सीमा से सटे इलाके, जिनकी पहले अनदेखी की गई थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शीर्ष प्राथमिकता बन गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमाई इलाकों में विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है
किरेन रिजिजू ने कहा ‘कुछ लोग सीमा को लेकर लापरवाही से टिप्पणी कर देते हैं। सीमाई क्षेत्र मुश्किल हैं, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार सीमा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की बहुत लंबी सीमा है जिसे औपचारिक रूप से तय नहीं किया गया है। वहां कोई सीमा स्तंभ नहीं हैं और जमीन पर सीमा रेखा साफ नहीं है। यह कोई नई बात नहीं है। जब तिब्बत एक अलग इकाई था, तब भी तिब्बत और भारत के बीच सीमा तय नहीं थी।’ उन्होंने कहा सीमा को लेकर वाकई एक मुद्दा है। अरुणाचल प्रदेश के कुछ ग्रामीणों ने सीमा को लेकर चिंता जताई है। यह सही भी है, क्योंकि वहां सीमा तय नहीं है।’केंद्नीय मंत्री ने बताया कि इन इलाकों का इस्तेमाल पहले शिकार और चराई के लिए होता था, रहने के लिए नहीं। सीमा तय न होने के कारण भारत और चीन के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। रिजिजू के मुताबिक मुद्दे की जड़ सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार से भी जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने बहुत पहले सडक़ें और अन्य ढांचा बनाना शुरू कर दिया था, जबकि कांग्रेस की सरकारों ने अलग नीति अपनाई।