राष्ट्रपति का भारतीय सूचना सेवा प्रशिक्षुओं को मंत्र, सोशल मीडिया पर लोगों की चिंताओं को सुनकर जवाब भी दें


नई दिल्ली :राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल लोगों को जानकारी देने और उनसे जुडऩे के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने और उनका जवाब देने के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। राष्ट्रपति ने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं से कहा, “आपको सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल लोगों को जानकारी देने और उनसे जुडऩे के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करना चाहिए।”
राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों की जानकारी लोगों तक स्पष्ट, सटीक और समय पर पहुंचे। मुर्मू ने कहा “इसके साथ ही आपकी एक समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सुनने की भी है। आपको लोगों की चिंताओं, उनकी आकांक्षाओं और उनकी प्रतिक्रिया को समझने का प्रयास करना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जनसंचार लोगों की जरूरतों के अनुरूप और नागरिक-केंद्रित हो।” राष्ट्रपति ने कहा कि लगातार जटिल होते सूचना के माहौल में अधिकारियों को तथ्यों और गलत सूचनाओं के बीच अंतर करना होगा। उन्होंने कहा “संकट के समय आपको जिम्मेदारी के साथ जवाब देना चाहिए। ऐसे समय में जब गलत सूचना बहुत तेजी से फैलती है, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों को प्रामाणिक जानकारी आसानी से और समय पर उपलब्ध हो।”उन्होंने कहा कि संचार के माध्यम ऐसे होने चाहिए, जिनसे सार्थक दोतरफा संवाद संभव हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में जहां सूचना तुरंत फैलती है, संचार में सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को हमेशा मार्गदर्शक बनाया जाना चाहिए। मुर्मू ने कहा”आपको नवीनतम तकनीकी उपकरणों का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना चाहिए। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नवाचार नैतिक मूल्यों, सही मानवीय निर्णय और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए किया जाए।” राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है
राष्ट्रपति ने कहा “एक जागरूक नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम होता है। भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं से उन्होंने कहा कि उनका काम अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य आधारित नीतियां बनाने में मदद करेगा। मुर्मू ने कहा हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। आपको नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए आंकड़ों को अधिक सुलभ बनाना चाहिए। आधुनिक, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम सांख्यिकीय व्यवस्था बनाने में आपका योगदान विकसित भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।” उन्होंने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव हैं। राष्ट्रपति ने कहा “आज की डेटा आधारित दुनिया में सार्वजनिक नीतियों की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समय पर और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि देश की सांख्यिकीय व्यवस्था डिजिटल तकनीकों और आंकड़े जुटाने तथा उनके विश्लेषण के नए तरीकों के जरिये महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा, “प्रभावी संचार और विश्वसनीय जानकारी एक जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक आधार हैं।”

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