पार्टी में बहुमत तय करने के लिए स्पष्ट नियमों की जरूरत :सुप्रीम कोर्ट


बहुमत का आकलन करने के लिए किसी कानून के तहत फॉर्मूला होना चाहिए
नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना यूबीटी से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी राजनीतिक पार्टी के अंदर बहुमत तय करने के लिए साफ तौर पर तय किए गए नियमों की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे नियम पार्टी के बंटवारे और नेताओं के पाला बदलने को लेकर बार-बार होने वाले विवादों को रोकने में मदद कर सकते हैं, खासकर उन मामलों में जहां लेजिस्लेचर पार्टी बंट जाती है या किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाती है।
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि किसी राजनीतिक दल के भीतर बहुमत कैसे तय किया जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि भले ही अलग-अलग गुट चुने हुए प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों या प्राथमिक सदस्यों की संख्या जैसे अलग-अलग पैमानों का सहारा ले सकते हैं, लेकिन बहुमत का आकलन करने के लिए चुनाव आयोग की गाइडलाइंस, पार्टी के संविधान या किसी कानून के तहत कोई फॉर्मूला होना चाहिए। अगर कोई तय पैमाना हो, तो इससे काफी हद तक ऐसी स्थितियों को रोका जा सकेगा।”जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि लेजिस्लेचर पार्टी पर राजनीतिक पार्टी का नियंत्रण बना रहता है और राजनीतिक पार्टी का कोई भी वैध निर्णय, लेजिस्लेचर पार्टी के बहुमत की इच्छा पर भी हावी रहता है। बेंच ने प्रतिनिधि लोकतंत्र को बनाए रखने और चुने हुए प्रतिनिधियों को राजनीतिक निर्णय लेने की कुछ छूट देने के बीच संतुलन पर भी चर्चा की। विवाद से जुड़े बड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए सीजेआई ने टिप्पणी की कि स्थिति “बहुत उलझी हुई” है और बहस केवल विधायकों की स्वायत्तता के बारे में नहीं है, बल्कि राजनीतिक शक्ति के इस्तेमाल के बारे में भी है।
छात्रों की बातें सुनो, समझो कि वे क्यों चिल्ला रहे हैं
सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शकारी छात्रों पर कार्रवाई की मांग पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन से निपटते समय अधिकारियों को संयम बरतना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें सावधानी से आगे बढऩा होगा ताकि युवा हिंसा में लिप्त न हों। बेहतर तरीका है कि हम उन्हें समझाएं और शांत करें। सबसे शक्तिशाली हथियार है उनकी बात सुनना। उनकी बात सुनें और समझने की कोशिश करें कि वे क्यों चिल्ला रहे हैं। सीजेआई ने कहा कि प्राथमिकता शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को सुगम बनाने की होनी चाहिए, साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो। यदि कोई घटना घटित होती है तो पुलिस को भी स्थिति को नियंत्रण से बाहर होने से रोकने के लिए बहुत संयम बरतना होगा। ऐसी घटना जहां भी घटित हो उससे बहुत सावधानी से निपटना होगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति से निपटने का निर्णय कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। वे आपसे और हमसे बेहतर जानते हैं कि इस तरह की स्थिति से कैसे निपटना है।

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