मुस्लिम कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुतवल्ली नहीं सज्जादानशीन होता है आध्यात्मिक प्रमुख


मुतवल्ली के कार्य विशुद्ध रूप से प्रशासनिक
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सज्जादानशीन वक्फ का आध्यात्मिक प्रमुख होता है और “सज्जादानशीन” की नियुक्ति एक धार्मिक मामला है, जबकि वक्फ के “मुतवल्ली” की भूमिका केवल वक्फ के प्रशासन और प्रबंधन से संबंधित होती है. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि “मोहम्मदन कानून की रूपरेखा के अनुसार सज्जादानशीन के पद की विशेषता यह है कि मूल संस्थापक को उत्तराधिकारी नियुक्त करने का अधिकार है, जिसे बदले में वही अधिकार प्राप्त होता है, और अधिकांश मामलों में, सज्जादानशीन का पद वंशानुगत हो जाता है.
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और विपुल एम पंचोली की पीठ ने फैसले में कहा कि मुतवल्ली और सज्जादानशीन के पदों को एक समान नहीं माना जा सकता. पीठ ने कहा कि वक्फ अधिनियम के तहत नियुक्त सज्जादानशीन वक्फ के मुतवल्ली का कार्यभार भी संभाल सकते हैं. हालांकि मुतवल्ली, सज्जादानशीन के रूप में कार्य नहीं कर सकते, बल्कि अधिनियम और नियमों में निर्धारित कर्तव्यों का ही निर्वहन कर सकते हैं. पीठ ने कहा “सज्जादानशीन वक्फ के आध्यात्मिक प्रमुख होते हैं और सज्जादानशीन की नियुक्ति एक धार्मिक मामला है. हालांकि,वक्फ के मुतवल्ली की भूमिका केवल वक्फ के प्रशासन और प्रबंधन से संबंधित होती है.”पीठ ने पाया कि मुतवल्ली के कार्य विशुद्ध रूप से प्रशासनिक हैं और मुतवल्ली का पद आध्यात्मिक पद नहीं है. पीठ ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि “मोहम्मदन कानून की रूपरेखा के अनुसार सज्जादानशीन के पद की विशेषता यह है कि मूल संस्थापक को अपने उत्तराधिकारी को मनोनीत करने का अधिकार है और उत्तराधिकारी को भी यही अधिकार प्राप्त होता है. पीठ ने कहा कि यह भी स्पष्ट है कि अधिकांश मामलों में सज्जादानशीन का पद वंशानुगत हो जाता है. पीठ ने कहा कि भारतीय न्यायालयों ने लगातार यह माना है कि ऐसे धार्मिक पदों का उत्तराधिकार सामान्यत: रीति-रिवाजों, प्रथा या पदधारी द्वारा नामांकन के आधार पर निर्धारित होता है, जो संस्था की विशिष्ट परंपराओं पर निर्भर करता है. पीठ ने कहा “मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं के संदर्भ में, सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि सज्जादानशीन या मुतवल्ली जैसे पद संस्था की स्थापित परंपराओं के अनुसार हस्तांतरित हो सकते हैं, जिसमें पूर्ववर्ती द्वारा नामांकन भी शामिल है, न कि उत्तराधिकार के सख्त नियमों के अनुसार.”

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