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आधुनिक युद्ध पारंपरिक सीमाओं से परे है : राजनाथ

हल्द्वानी । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युद्ध पारंपरिक सीमाओं से परे है और इसमें आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा शामिल है। नागरिकों द्वारा समर्थित एक सशक्त सेना राष्ट्र की रक्षा के लिए आवश्यक है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आजकल का युद्ध सीमाओं से परे है, राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा और यहां तक कि खाद्य सुरक्षा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि संघर्षों का स्वरूप बदल गया है, आर्थिक, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध से खतरे उभर रहे हैं, जिसके लिए सभी नागरिकों से निरंतर सतर्कता और तत्परता की आवश्यकता है।
रक्षा मंत्री ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के माध्यम से मानसिक दृढ़ता और बौद्धिक स्पष्टता विकसित करने का आह्वान किया ताकि वे किसी भी चुनौती का सामना करने में राष्ट्र की सहायता कर सकें। उन्होंने छात्रों से आधुनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए अपने स्वयं के संस्करण को अपनाने का आग्रह किया। रक्षा मंत्री ने सैनिक स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश को एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया, जो देश की ‘नारी शक्ति’ को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि ये लड़कियां आने वाले समय में ‘नारी शक्ति’ की मशालवाहक बनेंगी और विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छुएंगी।
पूरी दुनिया संकट के दौर से गुजर रही
रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवताओं की भूमि है और संस्कृति एवं आस्था का केंद्र है। इसलिए राज्य की पवित्रता की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार ने ही ‘वन रैंक, वन पेंशन’ योजना लागू की थी, जो पूर्व सैनिकों की लंबे समय से लंबित मांग थी। राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का लक्ष्य “संवाद और कूटनीति” के माध्यम से इनका समाधान करना है। उन्होंने संभावित ऊर्जा या उर्वरक संकट से निपटने में प्रधानमंत्री के प्रयासों की भी सराहना की, जो उनके अनुसार संघर्ष के कारण उत्पन्न हो सकता था। आज पूरी दुनिया संकट के दौर से गुजर रही है। यह सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। आज भी हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है कि युद्ध का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से निकलेगा। इस वैश्विक समस्या का हल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाला जा सकता है।

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