अलविदा ‘बाबू ,
शिवेंद्र तिवारी 9179259806 अलविदा ‘बाबू’ये सीलन भरी छत उस शंकर की है, जिसने तीन पंचवर्षीय व्यापारिक नगरी में विधायक रहकर सत्ता की सियासत की। छत के नीचे आम मध्यमवर्गीय संघर्षरत परिवार की तरह लोहे की जंग खाती आलमारी। दीवारें बता रही हैं इस घर के मालिक को चकाचौंध से कोई मोहब्बत न थी। सब कुछ…