शिवेंद्र तिवारी 9179259806

क्रिकेट इतिहास में ऐसा ‘फर्जी’ अंत शायद ही किसी वर्ल्ड कप सेमीफाइनल का हुआ हो।
22 मार्च 1992, सिडनी क्रिकेट ग्राउंड।
साउथ अफ्रीका (SA) अपने रंगभेदी प्रतिबंधों के बाद पहला वर्ल्ड कप खेल रहा था और सीधा सेमीफाइनल में पहुँच चुका था। सामने थी इंग्लैंड (ENG)
SA ने जीता और गेंदबाजी चुनी।
इंग्लैंड की पारी शुरू हुई बारिश के कारण मैच को पहले ही 45 ओवर का कर दिया गया था।
इंग्लैंड ने ग्रेम हिक (83 रन) की शानदार पारी की बदौलत 6 विकेट पर 252 रन बनाए।
साउथ अफ्रीका को लक्ष्य मिला 45 ओवर में 253 रन।
SA का चेज़ शुरू होत है ,पीटर कर्स्टन, एंडी वासेल्स और अंत में जोंटी रोड्स की तेज पारियों ने SA को लक्ष्य के करीब रखा।
इसमें विलेन बना ‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ नियम (The Most Productive Overs Rule)
यह टोटल डकवर्थ-लुईस सिस्टम (DLS) से नहीं दिया गया था। उस समय, वर्षा बाधित मैचों के लिए एक विवादास्पद नियम चलता था ‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ (MPO) मेथड ।
DLS (जो आज चलता है) इस घटना के बाद, इसी अन्याय को रोकने के लिए विकसित हुआ था।
( यह अलग बात है कि DLS भी किसी को फायदा किसी को नुक़्सान पहुचाता है )
वो दर्दनाक मूवमेंट
बारिश आने से ठीक पहले तक साउथ अफ्रीका मैच जीतने की स्थिति में था।
स्थिति (बारिश से पहले): साउथ अफ्रीका का स्कोर 42.5 ओवर में 231/6।
जीतने के लिए आवश्यक रन 13 गेंदों पर 22 रन।
(ब्रायन मैकमिलन और डैरेन कल्पिंस क्रीज़ पर थे)
यह समीकरण मुश्किल था, पर असंभव नहीं था। इसी समय बारिश शुरू हो गई।
बड़ा फैक्ट चेक: 14 रन का मूवमेंट!
जैसे ही बारिश रुकी और खिलाड़ी मैदान पर लौटे, स्कोरबोर्ड ने कई बार फ्लैश किया, जिससे भ्रम पैदा हुआ।
पहली गणना: बारिश के कारण 1 ओवर का समय बर्बाद हुआ, और उस समय की धीमी ओवर-रेट कटौती को जोड़कर, स्कोरबोर्ड ने पहले दिखाया कि 7 गेंदों पर 22 रन चाहिए।
दिक्कत यहीं थी: जब अंपायर और अधिकारी MPO नियम का इस्तेमाल करके आधिकारिक गणना कर रहे थे, तो इंग्लैंड के सबसे कम उत्पादक ओवर (जैसे मेरिक प्रिंगल के फेंके गए दो मेडन ओवर) को हटाया गया।
नियम के अनुसार, ओवर तो कटे, पर लक्ष्य में लगभग कोई बदलाव नहीं आया।
अंतिम, हास्यास्पद क्षण आया जब ..
अंततः, स्कोरबोर्ड पर नया और फाइनल लक्ष्य दिखाया गया 01 गेंद पर 22 रन चाहिए! (कुछ जगह 21 रन भी)।
यह 12 मिनट की बारिश और MPO नियम के कारण हुआ, जिसने साउथ अफ्रीका के चेज़ करने के लिए बचे हुए 13 गेंदों में 22 रन के लक्ष्य को अचानक 1 गेंद पर 22 रन का लक्ष्य बना दिया।
ब्रायन मैकमिलन ने आखिरी गेंद पर एक सिंगल लिया।
परिणाम: इंग्लैंड 19 रनों से जीत गया। 😢
MPO नियम की विफलता साबित हुई क्योकि यह नियम बहुत क्रूर था क्योंकि यह लक्ष्य को घटाते समय रन चेज़ करने वाली टीम के पास बचे हुए विकेटों और रन-रेट को ध्यान में नहीं रखता था।
डकवर्थ-लुईस का जन्म: इसके बाद इसी वजह ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को एक नए, न्यायसंगत नियम की आवश्यकता महसूस करवाई, जिसके परिणामस्वरूप DLS सिस्टम (1999) का जन्म हुआ।
रिजर्व डे की कमी भी इसका बड़ा कारण रही..
मीडिया और ब्रॉडकास्टर (चैनल नाइन) की मांगों के कारण मैच को उसी दिन खत्म करना पड़ा, अन्यथा शायद रिजर्व डे का इस्तेमाल हो सकता था।
यह मैच साउथ अफ्रीका के लिए फाइनल में जाने का पहला मौका था, जो एक अजीबोगरीब नियम के कारण उनसे छीन लिया गया।
यह सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि एक देश के पुनर्जन्म की उम्मीद का टूटना था।
NeverForget
आपकी इस मैच के बारे में क्या यादें हैं? कमेंट्स में बताएं!
( मैंने बारीकी से कई जगह से फेक्ट इकठ्ठा किये हैं फिर भी कोई कमी रेह् गई हो तो आप मुझे कमेंट मैं बता दीजिएगा )