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गिरता ही जा रहा कांग्रेस की राजनीति का स्तर :राजनाथ


कांग्रेस वैचारिक रूप से कमजोर हो चुकी
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में आप अपना विरोध जता सकते हैं, नीतियों पर सवाल उठा सकते हैं और सरकार की आलोचना कर सकते हैं लेकिन व्यक्तिगत मर्यादा की सीमाएं न लांघें। मेरी यही सलाह है। आज कांग्रेस न केवल राजनीतिक रूप से कमजोर हुई है, बल्कि मेरी नजर में, वैचारिक रूप से भी उसका पतन हुआ है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता हर चीज पर नजर रखती है और सही समय आने पर इसका करारा जवाब देती है। मैं कांग्रेस को यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी ऐसी टिप्पणियों से न तो विचलित होंगे और न ही जनता की सेवा करने के उनके संकल्प में कोई कमी आएगी। राजनाथ सिंह ने कहा “खरगे जी जिस पद पर आसीन हैं, उनसे सार्वजनिक जीवन में अधिक गंभीरता, संयम, मर्यादा और जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में, यदि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ही इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो यह न केवल उनके पद की गरिमा के विपरीत है, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन इस तरह का आचरण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। कल तक कांग्रेस के कुछ नेता, प्रधानमंत्री जी की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाते थे, उनकी माताजी के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते थे। आज वही स्तरहीन राजनीति कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस की राजनीति का स्तर हर रोज गिरने के नए रिकॉर्ड बना रहा है।” राजनाथ सिंह ने कहा “वैचारिक विरोध को व्यक्तिगत अपमान में बदल देना, राजनीतिक असहमति को अभद्र भाषा तक ले जाना और प्रधानमंत्री के परिवार को निशाना बनाना कांग्रेस की हताशा और वैचारिक शून्यता को दर्शाता है। यह सिर्फ एक व्यक्ति या परिवार का अपमान नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की गरिमा पर भी प्रहार है। लोकतंत्र में विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, सरकार की आलोचना कीजिए, लेकिन व्यक्तिगत मर्यादाओं का उल्लंघन मत कीजिए। आज कांग्रेस का सिफऱ् राजनीतिक ही नहीं बल्कि वैचारिक पतन भी हो चुका है। कांग्रेस को याद रखना चाहिए, कि लोकतंत्र में जनता हर बात का हिसाब रखती है, और समय आने पर जवाब भी देती। प्रधानमंत्री मोदी को ऐसी टिप्पणियों से न विचलित किया जा सकता है, न जनसेवा के उनके संकल्प को कमजोर किया जा सकता है।

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