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वायुसेना प्रमुख ने पाकिस्तान को चेताया, अब कोई लक्ष्य हमारी पहुंच से बाहर नहीं :एपी सिंह


नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर किए गए सटीक और नपे-तुले हमलों ने यह साबित कर दिया कि अब कोई भी लक्ष्य वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सफलता के बाद सेना को लापरवाह नहीं होना चाहिए। इसके बजाय अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करते रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से सबसे बड़ा सबक यह मिला कि सेना को हमेशा कई विकल्प खुले रखने चाहिए। दुश्मन की रणनीति बदलते ही अपनी रणनीति में भी तेजी से बदलाव करने की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने कहा “एक क्षमता-केंद्रित सेना ही ऐसा कर सकती है, क्योंकि वह किसी एक हथियार पर निर्भर न रहकर कई विकल्पों का इस्तेमाल कर सकती है।” इसी लचीलेपन की वजह से वायुसेना तनाव को अपने नियंत्रण में रखते हुए कार्रवाई करने में सफल रही। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने शानदार प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक गंभीर नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना ने पूरे अभियान के दौरान आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचाने और शून्य आकस्मिक नुकसान के अपने संकल्प का पूरी तरह पालन किया। उन्होंने साफ किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता किसी एक हथियार या लड़ाकू विमान की वजह से नहीं मिली। इसके पीछे सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सटीक मार करने वाले हथियार और मजबूत हवाई सुरक्षा व्यवस्था का संयुक्त तालमेल था। भारतीय वायुसेना की स्वदेशी नेटवर्क आधारित हवाई सुरक्षा व्यवस्था ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए कई ड्रोनों और लंबी दूरी के हथियारों को हवा में ही नाकाम कर दिया। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी प्रणाली, सुरक्षित नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों पर ध्यान दे रही है।
विकसित भारत 2047 के लिए वायुसेना का लक्ष्य
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना का लक्ष्य विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन से जुड़ा है। इसके तहत भारतीय वायुसेना ऐसी बहु-क्षेत्रीय एयरोस्पेस शक्ति बनना चाहती है, जो आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत हो। साथ ही वह देश के आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो।

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