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वैश्विक झटकों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत : शक्तिकांत दास


भारत की आर्थिक मजबूती सुधारों का नतीजा
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो मजबूत घरेलू मांग और निवेश की बेहतर स्थिति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता, व्यापार में बिखराव, तकनीकी प्रतिबंध, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर ऊंचे सार्वजनिक कर्ज के बीच भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत रहा है।
दास ने कहा कि पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि, कोविड के बाद के पांच वर्षों यानी 2021-22 से 2025-26 के दौरान दर्ज की गई औसत 7.9 प्रतिशत सालाना जीडीपी वृद्धि के ऊपर आई है। पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार लगातार मजबूत बनी हुई है। दास ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि पिछले एक दशक में किए गए व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, व्यापक आर्थिक स्थिरता और उत्पादक क्षमता में निवेश ने भारत को वैश्विक झटकों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की विकास यात्रा की एक खास बात यह रही है कि संकट आने से पहले ही शासन व्यवस्था की बुनियाद को धीरे-धीरे मजबूत किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में किए गए कई सुधार किसी एक समस्या के लिए तत्काल उपाय के तौर पर नहीं किए गए थे। बल्कि उनका उद्देश्य ऐसी व्यवस्थागत सुरक्षा तैयार करना था, जिससे अर्थव्यवस्था विभिन्न झटकों को झेल सके और तेजी से वापस पटरी पर आ सके।उन्होंने कहा, “भारत की मजबूती संयोग नहीं है। यह व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का परिणाम है।”उन्होंने कहा कि राजकोषीय नीति ने भी विकास को समर्थन देने वाले खर्च से समझौता किए बिना राजकोषीय मजबूती की दिशा में लगातार काम किया। दास ने जीएसटी सहित कर सुधारों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, जीएसटी ने एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने, अलग-अलग स्तर पर लगने वाले करों के प्रभाव को कम करने और अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण को बढ़ाने में मदद की। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र की स्थिति में सुधार भारत की आर्थिक मजबूती की एक “प्रमुख विशेषता” रहा है।

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