चित्रकूट में बाढ़ की तबाही देखने पहुंचे मुख्यमंत्री, संकट की घड़ी में पूरी सरकार बाढ़ पीडि़तों के साथ : डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया पैदल भ्रमण

जनहानि नहीं हुई, नुकसान काफी हुआ
अफसरों को 3 दिन रुकने के निर्देश
आश्रय स्थल जाकर बाढ़ प्रभावितों को दिए वस्त्र, घरेलू सामग्री और खाद्यान्न
चित्रकूट : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रीवा से सीधे चित्रकूट पहुंचे। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट में बाढ़ की आपदा से उत्पन्न परिस्थितियों का मुआयना किया। डॉ. यादव ने प्राचीन मुखार विन्द के पास बनाए गए आश्रय स्थल पहुंचकर सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनके कुशल-क्षेम की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री का वितरण किया और कहा कि संकट की इस घड़ी में हमारी पूरी सरकार आप लोगों के साथ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी नदी की बाढ़ से नदी का पानी घरो में घुसने से काफी नुकसान हुआ है। इसके अलावा चित्रकूट की अधोसंरचनाओं को भी क्षति पहुंची है। उन्होंने सभी प्रभावितों से कहा कि सरकार और प्रशासन आपदा की घड़ी में पीडि़तों के साथ है। सभी प्रभावितों को उनके हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। डॉ. यादव ने कहा कि चित्रकूट में जन जीवन सामान्य होने तक सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यहीं रूककर प्रभावितों को राहत पहुंचाने का काम करेंगे। डॉ. यादव ने आश्रय स्थल पर बाढ़ प्रभावित व्यक्तियों को वस्त्र, घरेलू सामग्री और खाद्यान्न आदि राहत सहायता सामग्री भी वितरित की। डॉ. यादव ने चित्रकूट नगर के रामधाम मोहल्ले में जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का पैदल भ्रमण किया। उन्होंने कीचड़ से सने मार्ग में पैदल चलकर प्रभावितों के घरों तक पहुंचकर जल भराव से हुए नुकसान का अवलोकन किया। उन्होंने प्रभावितों को भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में सरकार उनके साथ है और सभी प्रभावितों को नियमानुसार हरसंभव राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। डॉ. यादव ने जिलाधिकारियों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी लेते हुए सभी प्रभावित परिवारों को हर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पूरी तत्परता, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ सभी प्रभावितों को राहत सहायता उपलब्ध कराए। डॉ.यादव ने कहा कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की कोई भी कमी न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन की मुस्तैदी से अबतक किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। यहां राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं। साथ ही प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से नुकसान तो हुआ है, जिसका आंकलन किया जा रहा है। जिला प्रशासन के सभी संबंधित अधिकारी इस समय मौके पर ही मौजूद हैं। प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति पर सतत् निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भोजन, वस्त्र, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं।
आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी
डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने स्वयं शनिवार की रात रीवा में ही रुककर सतना और रीवा जिले में बाढ़ की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राहत की बात यह है कि घटना दिन के समय हुई थी और मौसम के पूर्वानुमान के चलते जिला प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में था। शासन की सजगता और सतर्कता तथा जिला प्रशासन की तत्परता से अब तक किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। डॉ. यादव ने कहा कि फिलहाल हमारा पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्यों में और तेजी लाने पर है, ताकि जलस्तर कम होने के बाद सभी प्रभावित लोगों को सुरक्षित रूप से उनके घरों तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बाढ़ से हुए नुकसान का समुचित आंकलन कर सभी प्रभावित परिवारों को प्रशासन द्वारा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने बाढ़ प्रभावित नागरिकों से स्वयं मुलाकात कर जिलाधिकारियों को सभी प्रभावितों को सूखा राशन एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के पशुओं की हानि हुई है या अन्य किसी भी प्रकार का नुकसान हुआ है, उसका विधिवत सर्वे कराया जाएगा और उन्हें भी नियमानुसार राहत एवं आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
सीएम ने प्रभावितों को बांटी राहत सामग्री
हेलीकॉप्टर से आरोग्यधाम पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने प्राचीन मुखारबिंद के पास बनाए गए आश्रय स्थल में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि नुकसान की भरपाई की जा सकती है, लेकिन जन हानि की भरपाई संभव नहीं होती। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।
तीन दिन चित्रकूट में रहकर बाढ़ की स्थिति पर नजर रखें
साथ ही मुख्यमंत्री ने एसीएस, कलेक्टर, एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे लगातार तीन दिन चित्रकूट में रहकर बाढ़ की स्थिति पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित क्षेत्रों से पानी पूरी तरह नहीं उतर जाता, तब तक राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहें। साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री इसके बाद हेलीकॉप्टर से ओरछा रवाना हुए, जहां उन्हें भाजपा की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में शामिल होना है।
अतिक्रमण से हुए निर्माणों की भी जांच
मुख्यमंत्री ने बाढ़ की वजहों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा के साथ ही अन्य कारणों की भी जांच जरूरी है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अतिक्रमण कर किए गए निर्माणों की रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन से कहा गया है कि ऐसे निर्माणों को चिन्हित कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट की प्राकृतिक और धार्मिक गरिमा को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही। उन्होंने दुकान में पानी भरने से हुए नुकसान का जायजा लिया और प्रभावितों को भरोसा दिलाया कि नियमानुसार हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आश्रय स्थल में बांटी राहत सामग्री
मुख्यमंत्री ने चित्रकूट विकास प्राधिकरण के आश्रय स्थल का भी निरीक्षण किया। यहां बाढ़ प्रभावितों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को साड़ी, टी-शर्ट, कंबल सहित अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही नुकसान के विस्तृत आकलन की प्रक्रिया तेज कर दी है।
मंदाकिनी की धार में बहा 300 मीटर लंबा पुल
बाढ़ का पानी उतरने के बाद रामघाट क्षेत्र में तबाही का मंजर सामने आया है। मंदाकिनी नदी पर बना करीब 300 मीटर लंबा पुल तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। पानी कम होने के बाद पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से और मलबे ने बाढ़ की भयावहता सामने ला दी। इसके अलावा कई घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों के सामान और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन नुकसान का आकलन करा रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश
सभी बाढ़ प्रभावित नागरिकों के लिए भोजन, वस्त्र, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं। प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जाए, रेस्क्यू किए गए ग्रामीणों के लिए भी शुद्ध पेयजल और भोजन सुनिश्चित किया जाए। बाढ़ से नुकसान के आकलन का कार्य समय पर हो। जिला प्रशासन के सभी संबंधित अधिकारी, प्रभावित क्षेत्र का निरंतर दौरा करे एवं वहीं रात्रि विश्राम करें। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ का समुचित सहयोग प्राप्त किया जाए। सभी प्रभावितों को सूखा राशन एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई जाए। प्रभावित परिवारों को प्रशासन के साथ ही अन्य आवश्यक सामग्री देने वाले स्वैच्छिक सहयोगियों से प्राप्त सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाए। स्थानीय निवासियों के साथ ही जो श्रद्धालु इस समय चित्रकूट आए हुए हैं, उन्हें भी आवश्यक सहायता प्रदान की जाए।

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